{"_id":"624360bf0358533e45113cde","slug":"high-court-ban-on-the-arrest-of-mla-abbas-son-of-mukhtar-ansari-sought-a-reply-from-the-government","type":"story","status":"publish","title_hn":"High court: मुख्तार अंसारी के बेटे विधायक अब्बास की गिरफ्तारी पर रोक, सरकार से जवाब तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High court: मुख्तार अंसारी के बेटे विधायक अब्बास की गिरफ्तारी पर रोक, सरकार से जवाब तलब
Wed, 30 Mar 2022 01:11 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 30 Mar 2022 01:11 AM IST
विज्ञापन
allahabad highcourt
- फोटो : Prayagraj
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मऊ की नगर कोतवाली में दर्ज मुकदमे में बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे विधायक अब्बास अंसारी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। विधायक के खिलाफ यह मुकदमा विधानसभा चुनाव के दौरान आपत्तिजनक बयान देने के आरोप में दर्ज किया गया था।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति वी के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने अब्बास अंसारी की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने बहस की। याची का तर्क था कि उस पर आरोप है कि तीन मार्च की चुनावी सभा में उसने सत्ता में आने पर अधिकारियों को सबक सिखाने की धमकी दी थी, जिसकी एफआईआर चार मार्च को दर्ज कराई गई थी।
याची की ओर से कहा गया कि आरोपों पर सात साल से अधिक सजा नहीं दी जा सकती और 153 ए संज्ञेय अपराध की धारा जानबूझकर जोड़ी गई है। कहा गया कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कराई गई है, लेकिन यह सही नहीं है। इस धारा में पुलिस याची को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है, जबकि वह मऊ से विधायक हैं। उन्हें शपथ लेने नहीं दी जा रही है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को तीन हफ्ते में याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका की सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। कोर्ट ने याची को विवेचना में सहयोग करने का निर्देश दिया है और कहा है कि सहयोग नहीं करते तो अंतरिम आदेश विखंडित करने की सरकार अर्जी दाखिल कर सकती है।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति वी के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने अब्बास अंसारी की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने बहस की। याची का तर्क था कि उस पर आरोप है कि तीन मार्च की चुनावी सभा में उसने सत्ता में आने पर अधिकारियों को सबक सिखाने की धमकी दी थी, जिसकी एफआईआर चार मार्च को दर्ज कराई गई थी।
विज्ञापन
याची की ओर से कहा गया कि आरोपों पर सात साल से अधिक सजा नहीं दी जा सकती और 153 ए संज्ञेय अपराध की धारा जानबूझकर जोड़ी गई है। कहा गया कि निर्वाचन आयोग के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कराई गई है, लेकिन यह सही नहीं है। इस धारा में पुलिस याची को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है, जबकि वह मऊ से विधायक हैं। उन्हें शपथ लेने नहीं दी जा रही है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को तीन हफ्ते में याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका की सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। कोर्ट ने याची को विवेचना में सहयोग करने का निर्देश दिया है और कहा है कि सहयोग नहीं करते तो अंतरिम आदेश विखंडित करने की सरकार अर्जी दाखिल कर सकती है।