हाईकोर्ट ने पूछा : सरकार बताए जमीन अधिग्रहण मामले में क्यों नहीं दिया गया मुआवजा
मामले में मुआवजे को लेकर 65 से अधिक याचिका लंबित हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की दो जजों की खंडपीठ सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मामले में सरकार से पूछा है कि अभी तक उसने काश्तकारों को मुआवजा क्यों नहीं दिया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कह रही है कि उसने अवार्ड के बाद रकम जमा कर दी है तो सरकार बताए कि क्या सही है और यदि सही है तो मुआवजा क्यों नहीं दिया गया या दिया जा रहा है। हाईकोर्ट ने यह आदेश जयपाल व अन्य बनाम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण व अन्य अन्य के मामले में दिया है। मामले की सुनवाई अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।
मामले में मुआवजे को लेकर 65 से अधिक याचिकाएं लंबित हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की दो जजों की खंडपीठ सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है। मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर उपस्थित एडिशनल सॉलिसीटर जनरल शशि प्रकाश सिंह ने प्राधिकरण के चेयरमैन का हलफनामा कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया।
हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर को पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने का दिया निर्देश
उन्होंने बताया कि प्राधिकरण ने अवार्ड के बाद जो भी रकम आई उसे राज्य सरकार के पास जमा कर दिया, लेकिन, याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि उन्हें अभी मुआवजे की रकम नहीं मिली है। इस पर कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ताओं से पूछा कि एनएचएआइ कह रही है कि उसने अवार्ड के बाद रकम जमा कर दी है तो सरकार बताए कि क्या सही है और यदि सही है तो काश्तकारों को मुआवजा क्यों नहीं दिया गया या दिया जा रहा है।
यूपी सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे रामानंद पांडेय ने कोर्ट को बताया कि अभी काश्तकारों को मुआवजे के रूप में आवंटित की गई धनराशि का अलग-अलग ब्यौरे का रिकॉर्ड नहीं मिल सका है। इस पर कोर्ट ने अलग-अलग याचिकाकर्ताओं के मामले में रिपोर्ट मांगी है। कहा है कि किन काश्तकारों को कितना मुआवजा दिया गया है या नहीं दिया गया है। सरकार पूरा ब्यौरा 17 दिसंबर को पेश करे। मामले में मुरादाबाद, सहारनपुर सहित पश्चिमी यूपी के कई जिलों के काश्तकारों ने मुआवजे की रकम न मिलने को लेकर याचिका दायर की है।