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High Court : अभियोजन निदेशक के रूप में एडीजी आशुतोष पांडेय की नियुक्ति अवैध करार, नहीं रखते निर्धारित योग्यता

Sat, 20 May 2023 11:51 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 20 May 2023 11:51 AM IST
सार

सीआरपीसी की धारा 25 ए के तहत महानिदेशक सहित अन्य पदों पर नियुक्ति की योग्यता 10 वर्ष की वकालत का अनुभव होना चाहिए। साथ ही, नियुक्ति में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सहमति भी होनी चाहिए। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा ने दलील दी कि एडीजी अभियोजन की नियुक्ति में धारा 25 ए का पालन नहीं किया गया, इसलिए यह नियुक्ति अवैध है।

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High Court: Appointment of ADG Ashutosh Pandey as Director of Prosecution is illegal, does not have prescribed
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अभियोजन निदेशालय के प्रमुख (अभियोजन निदेशक) के पद पर अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) आशुतोष पांडेय की नियुक्ति को कानून के विपरीत और अवैध करार दिया है। कोर्ट ने इसे दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 25 ए (2) के खिलाफ बताते हुए कहा कि वह निदेशक अभियोजन पद पर नियुक्ति की निर्धारित योग्यता नहीं रखते। वह इस पद पर रहने लायक नहीं हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को अभियोजन निदेशक की छह माह में नए सिरे से नियुक्ति निर्देश दिया है।

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न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केशरवानी और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने किशन कुमार पाठक की याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। न्यायमूर्ति केशरवानी के फैसले पर सहमत होते हुए न्यायमूर्ति बनर्जी ने फैसले में अलग से कानूनी उपबंधों की भी चर्चा की है। कोर्ट ने राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल की ओर से याचिका की पोषणीयता पर उठाई गईं प्रारंभिक आपत्तियों को भी खारिज कर दिया।

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अपर महाधिवक्ता की दलील थी कि संसद द्वारा पारित कानून को राज्य विधायिका ने अभी तक स्वीकृति नहीं दी है। लिहाजा, सीआरपीसी की धारा 25 ए उत्तर प्रदेश में लागू नहीं है। इस कारण इसका पालन भी बाध्यकारी नहीं है।

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10 वर्ष वकालत का अनुभव जरूरी

सीआरपीसी की धारा 25 ए के तहत महानिदेशक सहित अन्य पदों पर नियुक्ति की योग्यता 10 वर्ष की वकालत का अनुभव होना चाहिए। साथ ही, नियुक्ति में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सहमति भी होनी चाहिए। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा ने दलील दी कि एडीजी अभियोजन की नियुक्ति में धारा 25 ए का पालन नहीं किया गया, इसलिए यह नियुक्ति अवैध है। बिना विधिक प्राधिकार के विपक्षी पद पर कार्यरत हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाय।
 

केंद्र का कानून राज्य पर बाध्यकारी-हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने 14वेें विधि आयोग की संस्तुति पर 27 नवंबर 1980 को अभियोजन निदेशालय की स्थापना की थी। संसद ने धारा 25ए पारित किया तो राज्य सरकार ने संशोधन की कोशिश की, किंतु महाधिवक्ता की राय नहीं मिली। कोई निर्णय नहीं हुआ। इसलिए, केंद्र सरकार का कानून राज्य पर बाध्यकारी है। साथ ही, सीआरपीसी में धारा 25ए निर्विवाद रूप से जोड़ी गई और 23 जून 2006 से लागू भी है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को साधना शर्मा के मामले में इसे लागू कराने का आश्वासन भी दिया था। पर, अब सरकार कानून व फैसले का सम्मान नहीं कर रही। सरकार का यह कहना कि धारा 25ए प्रदेश में लागू नहीं है, निराधार है। कोई ऑफिस मेमोरंडम है तो उस पर कानून प्रभावी होगा।

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