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High Court : जाली दस्तावेजों के आधार पर मिली नियुक्ति शुरू से ही अमान्य
Wed, 13 May 2026 11:14 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 13 May 2026 11:14 AM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जालसाजी या फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी प्राप्त करता है, तो उसकी नियुक्ति कानून की नजर में शुरू से ही शून्य मानी जाएगी।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जालसाजी या फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी नौकरी प्राप्त करता है, तो उसकी नियुक्ति कानून की नजर में शुरू से ही शून्य मानी जाएगी। धोखाधड़ी के आधार पर प्राप्त किए गए किसी भी लाभ को वैध नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे मामलों में आरोपी किसी भी राहत का हकदार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने शामली जिले के एक सहायक शिक्षक की याचिका को खारिज करते दिया है।
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याची विनीत कुमार को वर्ष 2016 में शामली के एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थी ने इंटरमीडिएट परीक्षा के जो शैक्षिक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, वे फर्जी पाए गए। याची की तकनीकी शिक्षा की डिग्री में भी विसंगतियां मिलीं। इस आधार पर उसे पद से हटा दिया गया। इस फैसले को उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि दस्तावेजों में त्रुटि लिपिकीय गलती है।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि याची ने स्वयं ऑनलाइन आवेदन और काउंसलिंग के समय दिए गए हलफनामे में फर्जी रोल नंबर का उपयोग किया था। कोर्ट ने कहा कि जब नियुक्ति की बुनियाद ही धोखाधड़ी पर टिकी हो, तो उसे किसी भी स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती।
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अदालत ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से शिक्षक की सेवा समाप्ति के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही, मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने अधिकारियों को इस प्रकरण की गहराई से जांच करने निर्देश दिया।