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नाबालिग को पति के साथ रहने की इजाजत देने से हाईकोर्ट ने किया इनकार

Wed, 03 Feb 2021 08:47 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 03 Feb 2021 08:47 PM IST
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High court allahabad refuses to allow minor to live with husband
इलाहाबाद उच्च न्यायालय - फोटो : prayagraj

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अपनी मर्जी से शादी करने वाली नाबालिग लड़की को अपने पति के साथ रहने का वैधानिक अधिकार नहीं है। लड़की के बालिग होने तक उसे पति के पास रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह लड़की के बालिग होने तक उसे सुरक्षित आवास में सुविधाओं के साथ रहने की व्यवस्था करे। इस दौरान वह एक महिला मजिस्ट्रेट की निगरानी में रहेगी।  हापुड के जिला जज से कहा है कि वह लड़की की निगरानी के लिए  किसी महिला मजिस्ट्रेट को माह में एक बार लड़की से मिलने के लिए भेजते रहें।

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कोर्ट ने कहा कि जब लड़की बालिग हो जाए तो वह अपनी पसंद व इच्छा से  जिसके साथ रहना चाहे रह सकती है।वह शून्यकरणीय विवाह को मानने या शून्य घोषित करने के लिए उस समय स्वतंत्र होगी। कोर्ट ने एस एस पी प्रयागराज को लड़की को सुरक्षित हापुड के एस पी तक पहुंचाने का भी निर्देश दिया है। 
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यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने प्रदीप तोमर व अन्य की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

High court allahabad refuses to allow minor to live with husband
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
याचिका में न्यायिक मजिस्ट्रेट हापुड के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें उन्होंने नाबालिग  लड़की को अपने पति के साथ,रहने की छूट दे दी थी ।लड़की ने माता पिता के साथ जाने से इंकार कर दिया था और पति के साथ रहने की इच्छा जताई थी।कोर्ट ने नाबालिग लड़की को उसकी मर्जी से पति के साथ रहने के आदेश को विधि विरूद्ध मानते हुए रद्द कर दिया है।

 याची ने बेटी के अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई। प्राथमिकी में आरोप है कि पिंटू नाम का युवक उसे बहला फुसलाकर भगा ले गया।हाईस्कूल प्रमाणपत्र के अनुसार  लड़की 16 वर्ष की है।उसने मजिस्ट्रेट को दिए बयान में कहा था कि  कि वह अपनी मर्जी से पिंटू के साथ गई थी। उससे शादी कर ली है और अब उसी के साथ रहना चाहती है। गयी है।  

मजिस्ट्रेट ने लड़की को पति के साथ रहने की अनुमति दे दी। जिसे पिता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी और कहा कि वह नाबालिग है। पिता की मर्जी के खिलाफ किसी दूसरे के साथ रहने की छूट नही दी जा सकती।वह नैसर्गिक संरक्षक है। नाबालिग द्वारा किया गया विवाह शून्य है। हाईकोर्ट में पेश लड़की ने कोर्ट के सामने भी अपने माता पिता के साथ जाने से इंकार करते हुए पति के साथ रहने की इच्छा जाहिर की। इस पर कोर्ट ने उसके बालिग होने तक  सरकारी संरक्षण में सुरक्षित स्थान  में रखने का निर्देश दिया है।
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