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UP :पत्नी की फरसे से वार कर हत्या करने का आरोपी बरी, हाईकोर्ट ने कहा- पुलिस के सामने जुर्म कबूलना साक्ष्य नहीं

Thu, 12 Feb 2026 05:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 12 Feb 2026 05:51 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरसे से वार कर पत्नी की हत्या करने के आरोपी पति को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस के समक्ष जुर्म स्वीकार करना कानूनी रूप से साक्ष्य के तौर पर मान्य नहीं है।

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High Court: Accused of killing his wife with an axe acquitted, court said- confession of crime before police
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरसे से वार कर पत्नी की हत्या करने के आरोपी पति को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस के समक्ष जुर्म स्वीकार करना कानूनी रूप से साक्ष्य के तौर पर मान्य नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता व न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने राधा चरण शर्मा की अपील पर दिया है।

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मथुरा निवासी राधा चरण ने राया थाने पहुंच कर एफआईआर दर्ज कराई थी। उसने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया था कि 2 फरवरी 1983 की रात पत्नी से हुए विवाद के बाद उसने गुस्से में आकर फरसे से पत्नी की गर्दन काट दी थी। मथुरा की ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के इसी लिखित कबूलनामे और परिस्थितियों को आधार मानते हुए 19 जनवरी 1984 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को आरोपी पति ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अपील दायर की।

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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि पुलिस के समक्ष जुर्म कबूलना भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत मान्य साक्ष्य नहीं है। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नहीं कर पाया कि घटना के समय आरोपी घर में था। साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी पर सबूत का बोझ तब तक नहीं डाला जा सकता, जब तक अभियोजन अपने बुनियादी तथ्यों को ठोस तरीके से पेश न कर दे।

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बरामद फरसा नहीं था धारदार, कैसे हो सकते हैं गहरे घाव

हत्या में प्रयोग फरसे की बरामदगी के गवाह मुकर गए और मेडिकल रिपोर्ट ने भी अभियोजन के दावों की पुष्टि नहीं की। डॉक्टर के परीक्षण के अनुसार जो फरसा पुलिस ने बरामद किया था, वह इतना धारदार नहीं था कि उससे मृतका के शरीर पर मौजूद गहरे घाव किए जा सकें। इसके अलावा घटना के समय घर में मौजूद परिवार के अन्य सदस्यों को गवाह के तौर पर नहीं किया गया। आरोपी के विरुद्ध परिस्थितियों की कड़ी पूरी तरह से टूटी हुई है। ऐसे में संदेह का लाभ आरोपी को मिलना चाहिए है। इसी के साथ कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए राधा चरण शर्मा को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।

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