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मनीषा की जमानत पर जवाब तलब
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Tue, 20 Jan 2015 01:12 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। कानपुर के चर्चित ज्योति हत्याकांड में अभियुक्त मनीषा मखीजा के जमानत प्रार्थनापत्र पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। मनीषा की जमानत सेशन कोर्ट कानपुर द्वारा खारिज की जा चुकी है। उस पर ज्योति की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है। प्रार्थनापत्र पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अनिल कुमार शर्मा ने प्रदेश सरकार को दो सप्ताह में अपना पक्ष रखने का आदेश दिया है। जमानत पर 16 फरवरी को सुनवाई होगी। मनीषा के जमानत प्रार्थनापत्र में कहा गया है उसका हत्याकांड से कोई सरोकार नहीं है। प्राथमिकी में उसका नाम नहीं है और न ही उसके खिलाफ कोई सीधा साक्ष्य है। मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस ने उसे अभियुक्त बना दिया।
उल्लेखनीय है कि 27 जुलाई 2014 को कानपुर के चर्चित व्यापारी परिवार की बहू ज्योति श्याम दसवानी की कार में हत्या कर दी गई। हत्या पेशेवर हत्यारों ने की थी। इसकी प्राथमिकी ज्योति के पति पीयूष श्यामदसवानी ने दर्ज कराई। पुलिस जांच से पता चला कि हत्या के लिए पीयूष ने ही सुपारी दी थी। पुलिस ने पीयूष के साथ ही उसकी प्रेमिका मनीषा मखीजा और परिवार के अन्य सदस्योें को भी नामजद किया है। यह भी आरोप है कि मनीषा से प्रेम संबंधों के चलते ही ज्योति की हत्या कराई गई। मनीषा की जमानत पर वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी और अजातशत्रु पांडेय पक्ष रख रहे हैं जबकि ज्योति के पिता ने जमानत का विरोध करने के लिए विनय सरन और संगमलाल केसरवानी को खड़ा किया है।
पीयूष की मां और पिता सहित चार अन्य लोगों ने भी हाईकोर्ट मेें याचिका दाखिल की है। मां पूनम श्यामदसवानी और पिता ओमप्रकाश आदि की ओर से दाखिल याचिका में आरोपपत्र को चुनौती दी गई है। कहा गया है कि याचीगणों के खिलाफ पुलिस के पास कोई सुबूत नहीं है। उनकी इस मामले में किसी प्रकार की संलिप्तता नहीं है, इसलिए मुकदमे की कार्रवाई को रद किया जाए। इस याचिका पर भी अदालत ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब करते हुए तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। इस पर सुनवाई तीन फरवरी को होगी। मामले में अधिवक्ता दिलीप गुप्ता याचीगणों का पक्ष रख रहे हैं। ज्योति के पिता ने भी याचिका का विरोध के लिए वकील किया है।
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उल्लेखनीय है कि 27 जुलाई 2014 को कानपुर के चर्चित व्यापारी परिवार की बहू ज्योति श्याम दसवानी की कार में हत्या कर दी गई। हत्या पेशेवर हत्यारों ने की थी। इसकी प्राथमिकी ज्योति के पति पीयूष श्यामदसवानी ने दर्ज कराई। पुलिस जांच से पता चला कि हत्या के लिए पीयूष ने ही सुपारी दी थी। पुलिस ने पीयूष के साथ ही उसकी प्रेमिका मनीषा मखीजा और परिवार के अन्य सदस्योें को भी नामजद किया है। यह भी आरोप है कि मनीषा से प्रेम संबंधों के चलते ही ज्योति की हत्या कराई गई। मनीषा की जमानत पर वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी और अजातशत्रु पांडेय पक्ष रख रहे हैं जबकि ज्योति के पिता ने जमानत का विरोध करने के लिए विनय सरन और संगमलाल केसरवानी को खड़ा किया है।
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पीयूष की मां और पिता सहित चार अन्य लोगों ने भी हाईकोर्ट मेें याचिका दाखिल की है। मां पूनम श्यामदसवानी और पिता ओमप्रकाश आदि की ओर से दाखिल याचिका में आरोपपत्र को चुनौती दी गई है। कहा गया है कि याचीगणों के खिलाफ पुलिस के पास कोई सुबूत नहीं है। उनकी इस मामले में किसी प्रकार की संलिप्तता नहीं है, इसलिए मुकदमे की कार्रवाई को रद किया जाए। इस याचिका पर भी अदालत ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब करते हुए तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। इस पर सुनवाई तीन फरवरी को होगी। मामले में अधिवक्ता दिलीप गुप्ता याचीगणों का पक्ष रख रहे हैं। ज्योति के पिता ने भी याचिका का विरोध के लिए वकील किया है।
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