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इलाहाबाद हाईकोर्ट में 8 मई से खुली अदालत में होगी सुनवाई, दो शिफ्टों में होगा काम
Mon, 04 May 2020 06:46 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 04 May 2020 06:46 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट में 8 मई शुक्रवार से पूर्व की भांति खुली अदालत में सुनवाई शुरू हो जाएगी। वकीलों की मांग पर हाइकोर्ट प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। नई व्यवस्था में अदालतें दो शिफ्टों में बैठेंगी। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में हुई न्यायमूर्तियों की प्रशासनिक समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव ने अधिसूचना जारी कर बताया है कि 8 मई से अपरान्ह साढे दस बजे से साढ़े बारह बजे एवं डेढ़ बजे से साढ़े तीन बजे तक आपराधिक एवं सिविल मामलों की सुनवाई खुली अदालत में की जाएगी।
नए मुकदमे ऑनलाइन एवं व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में दाखिल किए जा सकेंगे। अब हर दाखिल मुकदमे की सुनवाई होगी। अतिआवश्यक सुनवाई की अर्जी देने की जरूरत नहीं होगी।
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यह ट्रायल के तौर पर शुरू किया जा रहा है। जिन वकीलों के मुकदमे लगे होंगे, उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अदालतों में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। कोरोना वायरस के प्रकोप व देश व्यापी लॉकडाउन के कारण हाईकोर्ट मे अतिआवश्यक मुकदमों की ही सुनवाई वीडियो कान्फ्रेन्सिंग से की जा रही थी।
अधिवक्ताओं एवं बार संगठनों के दबाव के चलते हाईकोर्ट ने खुली अदालत में सुनवाई कर न्याय देने की स्थापित परंपराओं का पालन करने का फैसला लिया है।
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महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव ने अधिसूचना जारी कर बताया है कि 8 मई से अपरान्ह साढे दस बजे से साढ़े बारह बजे एवं डेढ़ बजे से साढ़े तीन बजे तक आपराधिक एवं सिविल मामलों की सुनवाई खुली अदालत में की जाएगी।
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नए मुकदमे ऑनलाइन एवं व्यक्तिगत रूप से कार्यालय में दाखिल किए जा सकेंगे। अब हर दाखिल मुकदमे की सुनवाई होगी। अतिआवश्यक सुनवाई की अर्जी देने की जरूरत नहीं होगी।
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यह ट्रायल के तौर पर शुरू किया जा रहा है। जिन वकीलों के मुकदमे लगे होंगे, उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अदालतों में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। कोरोना वायरस के प्रकोप व देश व्यापी लॉकडाउन के कारण हाईकोर्ट मे अतिआवश्यक मुकदमों की ही सुनवाई वीडियो कान्फ्रेन्सिंग से की जा रही थी।
अधिवक्ताओं एवं बार संगठनों के दबाव के चलते हाईकोर्ट ने खुली अदालत में सुनवाई कर न्याय देने की स्थापित परंपराओं का पालन करने का फैसला लिया है।