ज्ञानवापी केस : अंजुमन इंतजामिया कमेटी की याचिका पर सुनवाई जारी, ज़िला जज वाराणसी के आदेश को दी गई है चुनौती
सिविल वाद पूजा के अधिकार को लेकर दाखिल किया गया है। किसी लिखित आदेश नहीं, मौखिक आदेश से सरकार द्वारा पूजा के अधिकार से वंचित करने को लेकर वाद दायर किया गया है। नकवी का कहना है कि काल्पनिक मंदिर में पूजा की इजाजत मांगी गई है।
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ज्ञानवापी परिसर वाराणसी स्थित शृंगार गौरी व अन्य मंदिरों में नियमित पूजा के अधिकार को लेकर वाराणसी की जिला अदालत के फैसले की चुनौती याचिका पर सुनवाई जारी है। सुनवाई 23 नवंबर को भी होगी। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से दाखिल पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति जे जे मुनीर कर रहे हैं। याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एस एफ ए नकवी ने बहस की। इनका कहना है कि वाद कारण 1990, 1993 व 21 अप्रैल 21 बताया गया है, जो स्वयं में स्पष्ट नहीं है।
सिविल वाद पूजा के अधिकार को लेकर दाखिल किया गया है। किसी लिखित आदेश नहीं, मौखिक आदेश से सरकार द्वारा पूजा के अधिकार से वंचित करने को लेकर वाद दायर किया गया है। नकवी का कहना है कि काल्पनिक मंदिर में पूजा की इजाजत मांगी गई है। ऐसी मूर्ति की पूजा की मांग की गई है, जो अदृश्य है। यदि यह मांग मान ली गई तो धार्मिक स्थल का स्वरूप बदल जाएगा। परोक्ष रूप से 1991 के प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के खिलाफ होगा।
हालांकि कि कोर्ट कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में मस्जिद ढांचे की दीवाल पर शृंगार गौरी की पूजा का जिक्र किया गया है। नकवी ने कहा, 1990 में पूजा को लेकर कोई नहीं बोला। 18 केस दाखिल हुए हैं। सिविल वाद की मांग बिना दूसरे को हटाये पूरी नहीं की जा सकती। सवाल उठा कि पुराना मंदिर व मस्जिद का विवाद है। जो बिना साक्ष्य के तय नहीं किया जा सकता।
यह भी कहा गया कि वक्फ बोर्ड ने सरकार को कुछ जमीन दी और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने भूमि का एक्सचेंज किया। वाद सरकार के खिलाफ दाखिल किया गया है। जिलाधिकारी पूजा की अनुमति नहीं दे रहे हैं। नकवी ने कहा कि सिविल वाद में आदि विश्वेश्वर, शृंगार गौरी, भगवान हनुमान मंदिर घोषित करने व पूजा का अधिकार दिए जाने की मांग की गई है। पूजा आरती व भोग की अनुमति मांगी गई है। यदि मांगें मान ली गईं तो धार्मिक स्थल की प्रकृति बदल जाएगी।
साल में एक दिन पूजा होने का दावा किया गया है। उसी आधार पर पूजा के अधिकार का दावा किया गया है। मामले में कुछ हिंदू महिलाओं द्वारा दाखिल सिविल वाद की स्वीकार्यता पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति निरस्त कर दी गई। जिला जज के इस आदेश को याचिका में को चुनौती दी गई है। वाराणसी के जिला जज ने 12 सितंबर के आदेश से हिंदू पक्ष की महिलाओं द्वारा शृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना की मांग में दाखिल वाद के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी थी।
दिल्ली की राखी सिंह व कई अन्य महिलाओं ने जिला जज वाराणसी की कोर्ट में वाद दायर कर ज्ञानवापी परिसर के बाहरी हिस्से में स्थित शृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना किए जाने की मांग की है। मुस्लिम पक्ष की तरफ से ज्ञानवापी मस्जिद की अंजुमन ए इंतजामिया कमेटी ने हिंदू महिलाओं के बाद पर आपत्ति दर्ज की तथा कहा था कि यह वाद सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश सात नियम 11 के तहत सुनवाई लायक नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। जिला जज ने मुस्लिम पक्ष की तरफ से उठाई गई आपत्ति की अर्जी खारिज खारिज कर दी।
जिसे चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई वाराणसी के जिला जज की कोर्ट में चल रही है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एक बार फिर दोहराया गया है कि 1991 के प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट के तहत इस मामले की सुनवाई नहीं की जा सकती है। अर्जी में हाईकोर्ट का फैसला आने तक वाराणसी की अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाए जाने की भी मांग की गई है। ज्ञानवापी विवाद से जुड़े पांच मामले पहले से ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेंडिंग है। बहस पूरी नहीं हो सकी। बहस जारी है, बुधवार को भी बहस होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कुछ मीडिया वेबसाइट पर चल रही खबरों पर नाराजगी जताई। कहा कि वे मनमाने तरीके से खबरों को प्रसारित नहीं कर सकते।