इरफान सोलंकी को झटका : चुनावी बिगुल के बीच अपीलों पर फिर टली सुनवाई, अब छह नवंबर को होगी बहस
कानपुर के सीसामऊ के पूर्व विधायक सोलंकी को एक महिला का घर जलाने के आरोप में ट्रायल कोर्ट से सात साल की सजा सुनाई गई है। इस सजा के खिलाफ इरफान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटकटाया है। उन्होंने सजा को रद्द करने के लिए अपील दायर की है, जिस पर बहस होनी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट से सीसामऊ विधानसभा से विधायक रहें इरफान सोलंकी का तगड़ा झटका लगा है। जाजमऊ के अगजनी कांड में मिली सजा को लेकर दाखिल अपीलों पर बृहस्पतिवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अब सुनवाई छह नवंबर को होगी। वहीं, उपचुनाव का बिगुल फूंक चुका है। खाली हुई विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने उनकी पत्नी नसीम सोलंकी को प्रत्याशी बनाया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति सुरेंद्र सिंह प्रथम की अदालत कर रही है। बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से बताया गया कि अपर महाधिवक्ता पीसी श्रीवास्तव ने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब तक वह मामले में सरकार का पक्ष रख रहे थे। लिहजा, पक्ष रखने के लिए सरकार को समय की जरूरत है।
गौरतलब है कि जाजमऊ थाना क्षेत्र के डिफेंस कॉलोनी निवासी नजीर फातिमा की झोपड़ी में आग लगाने के मामले में कानपुर नगर की एमपी/एमएलए की विशेष अदालत ने इरफान , उसके भाई रिजवान समेत दस को सात साल कारावास की सजा सुनाई थी। सजा को रद्द करने की मांग के साथ इरफान और रिजवान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहीं, प्रदेश सरकार ने सात साल की सजा की नाकाफी बताते हुए उम्रकैद की मांग की है।
हाईकोर्ट ने इरफान और सरकार की अपीलों पर एकसाथ सुनवाई चल रही है। इरफान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल चतुर्वेदी और उपेंद्र उपाध्याय बहस कर रहे है, जबकि सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता पीसी श्रीवास्तव और एजीए प्रथम जेके उपाध्याय पक्ष रख रहे है।
पत्नी नसीम का चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे इरफान
बृहस्पतिवार को होने वाली सुनवाई टलने के बाद साफ है कि इरफान सोलंकी सीसामऊ विधानसभा के उपचुनाव में अपनी पत्नी व सपा प्रत्याशी नसीम सोलंकी का चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे। इरफान को सजा सुनाये जाने के बाद कानपुर के सीसामऊ की विधान सभा की सीट खाली हुई है। समाजवादी पार्टी ने इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। अगर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से मिली सजा पर रोक लगा दी होती तो उनकी सदस्यता बच जाती। लेकिन अब तक जमानत भी नहीं मिल सकी है। उधर, उपचुनाव का बिगुल भी फूंक चुका है।