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अपने ही डॉक्टर को खोज नहीं पा रहा स्वास्थ्य विभाग

Tue, 14 Jan 2020 01:00 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jan 2020 01:00 AM IST
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Health department is unable to find its own doctor
प्रयागराज। स्वास्थ्य विभाग अपने ही डॉक्टर को खोज नहीं पा रहा है। कोर्ट से प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को डॉक्टर सत्येंद्र सिंह को साक्ष्य के लिए हाजिर करने हेतु तीन वर्षों से लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं। लेकिन, विभाग कोई जवाब नहीं दे रहा है और न ही डॉक्टर का ठिकाना बता पा रहा है। डॉक्टर के गवाही न देने से 25 साल पुराने मुकदमे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता श्रीप्रकाश शुक्ल और राहुल मिश्र ने बताया कि प्रकरण 1995 का मारपीट और एससी-एसटी का है। मुकदमा सरकार बनाम मुन्नू यादव आदि वर्तमान में एडीजे 15 के न्यायालय में लंबित हैं। मुकदमे में कोर्ट ने अभियुक्तों के खिलाफ सात जनवरी 1999 को आरोप तय कर दिया था और तब से साक्ष्य में लंबित है। इसमें चोटहिल रामजस सहित पांच गवाहों की गवाही हो चुकी है। मारपीट की घटना में घायल रामजस और राधेश्याम की चोटों का परीक्षण पीएचसी चायल खास के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर सत्येंद्र सिंह ने 30 सितंबर 1995 को किया था।
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प्रकरण में डॉक्टर के गवाही देने उपस्थित न होने पर कोर्ट ने सीएमओ प्रयागराज से रिपोर्ट तलब की थी। सीएमओ ने रिपोर्ट दी थी कि डॉक्टर सत्येंद्र का स्थानांतरण कन्नौज हो गया है। सीएमओ कन्नौज से रिपोर्ट आई कि उनके यहां डॉ. सत्येंद्र सिंह नियुक्त ही नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने सात जुलाई 2018 के बाद कई बार उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को पत्र लिख कर कहा कि डॉक्टर की तैनाती और उनके ठिकाने का पता लगाकर कोर्ट को सूचित किया जाए, मगर तीन वर्षों के दौरान स्वास्थ्य विभाग डॉक्टर का पता नहीं बता पाया है।
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घटना 29 सितंबर 1995 की अब पिपरी थाने (अब कौशांबी जिले में) के आलमपुर गांव की है। वादी संपत ने मुन्नू लाल यादव, कमलेश और दरियाव के खिलाफ बंदूक से फायर कर घायल करने और जाति सूचक शब्दों का प्रयोग कर गाली देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
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