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स्वामी निश्चलानंद बोले : सेना का नेतृत्व क्षत्रियों के हाथों में होना चाहिए, लड़ाकू कौम भी सेना में हों शामिल

Wed, 28 Jun 2023 12:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 28 Jun 2023 12:46 PM IST
सार

पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने आगे कहा कि भगवान राम और रावण के बीच जब युद्ध हुआ तो उस वक्त भी परंपरा प्राप्त खानदानी क्षत्रिय राम और लक्ष्मण ही थे। देवता हनुमान इत्यादि तो आए थे, लेकिन बाकी सब युद्ध में वैकल्पिक क्षत्रिय के रूप में ही थे।

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he leadership of the army should be in the hands of the Kshatriyas
स्वामी निश्चलानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा है कि महाभारत में इस तथ्य को उद्भाषित किया गया है कि सेना का नेतृत्व क्षत्रियों के हाथों में होना चाहिए, लेकिन लड़ाकू कौम कोल आदि के लोग भी सेना में शामिल हों। पुरी शंकराचार्य ने ये बातें मंगलवार को अपने शिवगंगा आश्रम में पांच दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन भक्तों के प्रश्न के उत्तर में कहीं। बुधवार को पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद अपने शिष्यों के साथ छत्तीसगढ़ के लिए प्रस्थान करेंगे।

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पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने आगे कहा कि भगवान राम और रावण के बीच जब युद्ध हुआ तो उस वक्त भी परंपरा प्राप्त खानदानी क्षत्रिय राम और लक्ष्मण ही थे। देवता हनुमान इत्यादि तो आए थे, लेकिन बाकी सब युद्ध में वैकल्पिक क्षत्रिय के रूप में ही थे। कहा कि स्वतंत्र भारत में यह भी घटना घट चुकी है कि जो लड़ाकू परंपरा के नहीं थे वो काम का बहाना लेकर सीमा से भाग गए थे।

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कहा कि चीन के घुसपैठियों को भारत में पर्याप्त स्थान दिया गया। तब स्वतंत्र भारत में देश की सुरक्षा की दृष्टि से हालत बहुत दुर्बल था। पर इस वक्त प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री इन सब बातों को लेकर बहुत सावधान हैं। कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वैश्य को अस्त्र-शस्त्र उठा लेना चाहिए। इसके लिए उन्हें भी प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है। इसलिए मैं 30 वर्षों से कहता आ रहा हूं कि हर हिंदू सेना हो और हर हिंदू सनातनी हो।

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पुरी शंकराचार्य ने कहा कि सरदार बल्लभ भाई पटेल ने दूरदर्शिता दिखाते हुए सेना को जल, थल और नभ में विभक्त किया था, क्योंकि उन्हें मालूम था कि अगर तीनों एक ही रहेंगे तो भारत में कभी भी सैन्य शासन लागू हो सकता है। वर्तमान में पाकिस्तान में ऐसा हो रहा है। कहा कि वर्तमान में तीर्थ स्थल को भोग स्थल बनाया जा रहा है। यह कहीं से भी उचित नहीं है।

कहा कि जैनियों ने यह साहस किया और तीर्थस्थल पारसनाथ को पर्यटन स्थल नहीं बनने दिया। सावन मास में कांवड़ यात्रा को लेकर किए गए सवाल पर पुरी शंकराचार्य ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान शासनतंत्र को सतर्कता का परिचय देना चाहिए। कांवड़िया कभी-कभी मार्ग में दुर्घटना का भी शिकार हो जाते हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।

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