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UP: HC कैथोलिक डायोसिस ऑफ गोरखपुर पर लगाया 10 लाख का हर्जाना, कहा-आसमान गिरने पर भी किया जाएगा न्याय

Thu, 12 Sep 2024 04:16 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: निकिता गुप्ता Updated Thu, 12 Sep 2024 04:16 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर में एक ग्रामीण की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में कैथोलिक डायोसिस ऑफ गोरखपुर और प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का हर्जाना लगाया।
 

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HC imposes Rs 10 lakh damages on Catholic Diocese of Gorakhpur, says justice will be done even if the sky
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ग्रामीण की जमीन पर गलत तरीके से कब्जा जमाने के लिए कैथोलिक डायोसिस ऑफ गोरखपुर और प्रदेश सरकार पर संयुक्त रूप से 10 लाख का हर्जाना लगाया है। मामला लंबित रहने के दौरान वादी भोला सिंह की मौत हो गई। वहीं, 32 साल से अधिक वर्ष तक वारिसों को इस जमीन के उपयोग से वंचित रखा गया। इस पर न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की अदालत ने तल्ख टिप्पणी कर कहा कि आसमान गिरने पर भी न्याय किया जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार और डायोसिस ने एक साथ मिलकर वादी भोला की भूमि पर कब्जा किया। जिला और सचिवालय स्तर पर पूरी राज्य मशीनरी की मदद से दस्तावेजों में हेराफेरी कर वादी और उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को अचल संपत्ति के उपयोग से लंबे समय तक वंचित रखा गया। ऐसे में यह कोर्ट हर्जाना लगाना उचित समझता है।

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गोरखपुर के गांव जंगल सालिकराम में भूखंड संख्या 26 रकबा 93 डिसमिल पर वादी भोला भूमिधर था। कैथोलिक डायोसिस ऑफ गोरखपुर इस जमीन पर प्रदेश सरकार से पट्टा प्राप्त करने का दावा कर चहारदीवारी बनाने लगा। इसके विरोध में भोला ने सिविल वाद दाखिल किया।
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ट्रायल कोर्ट से राहत न मिलने पर भोला ने प्रथम अपील दाखिल की। कोर्ट ने अपील स्वीकार कर दर्शायी गई जमीन से चहारदीवारी हटाने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि वादी के कब्जे में कोई हस्तक्षेप न करे। साथ ही उप रजिस्ट्रार-प्रथम, गोरखपुर के समक्ष 13 जनवरी 1993 को पंजीकृत पट्टा विलेख शून्य और अप्रभावी घोषित कर दिया।

प्रथम अपील के विरोध में कैथोलिक डायोसिस ऑफ गोरखपुर के अध्यक्ष की ओर से हाईकोर्ट में सेकेंड अपील दाखिल की गई। कोर्ट ने कहा कि प्रथम अपीलीय न्यायालय के फैसले में कोई त्रुटि नहीं मिली। सिवाय इसके कि अपीलकर्ता और प्रदेश सरकार भारी हर्जाना लगाया जाना चाहिए था।


कोर्ट ने कहा कि एक बार जब यह न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंच गया कि प्रदेश सरकार के साथ-साथ अपीलकर्ता की कार्रवाई को कानून की कोई मंजूरी नहीं है, बल्कि एक ग्रामीण की जमीन हड़पने के लिए कार्रवाई की गई तो तत्काल हर्जाने के साथ अपील खारिज कर दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि हर्जाना राशि तीन महीने के भीतर न्यायालय के समक्ष जमा की जाएगी। उसके बाद उसे वादी-भोला के कानूनी प्रतिनिधियों के पक्ष में तुरंत जारी की जानी चाहिए।

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