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गुलाब-चमेली के फूलों से सजा ताबूत, हाय हुसैन की गूंजी सदाएं
Sat, 17 Oct 2020 04:55 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2020 04:55 PM IST
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गुलाब-चमेली के फूलों से सजा ताबूत
- फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज। पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मदे मुस्तफा और दूसरे इमाम हसन-ए- मुजतबा की शहादत पर अंजुमन मजलूमियां की ओर से शुक्रवार को रानीमंडी से उठने वाला जुलूस कोविड -19 के कारण नहीं निकाला जा सका। अलबत्ता अजाखानों के अंदर ही शहादत की मजलिस हुई। अंजुमन मजलूमियां के नौहाख्वान राजन अब्बास ने हाय रसूले खुदा... हाय इमामे हसन... की सदा बुलंद करते हुए गमगीन नौहा पढ़ा। उधर, दरियाबाद इमामबाड़ा जद्दन मीर साहब में नजीब इलाहाबादी की निजामत में शहादत इमाम हसन का मार्मिक जिक्र किया गया। इस दौरान लोगों की आंखें गमगीन हो गईं।
मौलाना हैदर अब्बास ने जादाह नाम की महिला की ओर से इमाम हसन को जहर दे कर शहीद करने के दर्दनाक मंजर का जिक्र किया, तो अजादाराने इमाम की आंखें छलक पड़ीं। अंजुमन हैदरिया के सदस्यों ने नौहा और मातम का नजराना पेश किया। दरियाबाद के जोगीघाट में असलम रिजवी की ओर से आयोजित मजलिस को जाकिरे अहलेबैत अनीस जायसी ने खिताब किया। इस दौरान हैदर जैदी ने सोजख्वानी के फराएज अंजाम दिए। अंजुमन असगरिया के नौहाख्वानों ने पुरदर्द नौहा पढ़ा। इसी तरह करैली स्थित मरकजे अनवार में मौलाना फैजान जव्वादी की ओर से आयोजित मजलिस को मौलाना मुंतजिर अब्बास ने खिताब किया। मजलिस से पूर्व अरमान व फरदान ने पेशख्वानी के जरिए इमाम हसन की शहादत पर मार्मिक अंदाज में मर्सिया पढ़ा।
रौशन बाग स्थित मतलूब हुसैन के अजाखाने पर मौलाना जव्वाद हैदर जव्वादी ने मजलिस को खिताब करते हुए रसूले अकरम मोहम्मदे मुस्तफा और दूसरे इमाम हसन-ए-मुजतबा की शहादत का मार्मिक अंदाज में वाकया सुनाया तो हर आंख अश्कबार हो गई। हरी चादर और गुलाब, चमेली के फूलों से सजा इमाम हसन का ताबूत निकाला गया। अकीदतमंदों ने फूल माला चढ़ा कर बोसा लिया और मन्नतें मांगी। इस मौके पर अंजुमन गुंचा -ए -कासिमियां के नौहाख्वान शादाब जमन, अखलाक रजा, शबीह अब्बास, अस्करी अब्बास, जहीर अब्बास, कामरान रिजवी, एजाज नकवी, असद रिजवी, अकबर रिजवी हसन अस्करी का लिखा कदीमी नौहा पढ़ कर पुरसा पेश किया। इसी तरह इमामबाड़ा मुस्तफा हुसैन में शहादत पर ऑनलाइन मजलिस हुई।
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साकिब रजा ने पेशख्वानी, तो मौलाना आबिद अली रिजवी ने मजलिस को खेताब किया। उम्मुल बनीन सोसाइटी के महासचिव व अंजुमन गुंचा -ए -कासिमियां के प्रवक्ता सैयद मोहम्मद अस्करी के मुताबिक सभी अजाखानों से उठने वाले जुलूस को सरकार की गाइड लाइन और मरजा -ए -वक्त की गाइड लाइन पर अमल करते हुए नहीं निकाला गया। मजलिस में मौलाना रजी हैदर, मौलाना डॉ रिजवान हैदर रिजवी,नजीब इलाहाबादी,आफताब रिजवी, वकार रिजवी, सैयद मोहम्मद अस्करी, मंजर कर्रार, सैयद अजादार हुसैन, रौनक सफीद पुरी, शबी हसन, रिजवान जव्वादी, सलमान हैदर रिजवी, काशान रिजवी, जामिन हसन उपस्थित थे।
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मौलाना हैदर अब्बास ने जादाह नाम की महिला की ओर से इमाम हसन को जहर दे कर शहीद करने के दर्दनाक मंजर का जिक्र किया, तो अजादाराने इमाम की आंखें छलक पड़ीं। अंजुमन हैदरिया के सदस्यों ने नौहा और मातम का नजराना पेश किया। दरियाबाद के जोगीघाट में असलम रिजवी की ओर से आयोजित मजलिस को जाकिरे अहलेबैत अनीस जायसी ने खिताब किया। इस दौरान हैदर जैदी ने सोजख्वानी के फराएज अंजाम दिए। अंजुमन असगरिया के नौहाख्वानों ने पुरदर्द नौहा पढ़ा। इसी तरह करैली स्थित मरकजे अनवार में मौलाना फैजान जव्वादी की ओर से आयोजित मजलिस को मौलाना मुंतजिर अब्बास ने खिताब किया। मजलिस से पूर्व अरमान व फरदान ने पेशख्वानी के जरिए इमाम हसन की शहादत पर मार्मिक अंदाज में मर्सिया पढ़ा।
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रौशन बाग स्थित मतलूब हुसैन के अजाखाने पर मौलाना जव्वाद हैदर जव्वादी ने मजलिस को खिताब करते हुए रसूले अकरम मोहम्मदे मुस्तफा और दूसरे इमाम हसन-ए-मुजतबा की शहादत का मार्मिक अंदाज में वाकया सुनाया तो हर आंख अश्कबार हो गई। हरी चादर और गुलाब, चमेली के फूलों से सजा इमाम हसन का ताबूत निकाला गया। अकीदतमंदों ने फूल माला चढ़ा कर बोसा लिया और मन्नतें मांगी। इस मौके पर अंजुमन गुंचा -ए -कासिमियां के नौहाख्वान शादाब जमन, अखलाक रजा, शबीह अब्बास, अस्करी अब्बास, जहीर अब्बास, कामरान रिजवी, एजाज नकवी, असद रिजवी, अकबर रिजवी हसन अस्करी का लिखा कदीमी नौहा पढ़ कर पुरसा पेश किया। इसी तरह इमामबाड़ा मुस्तफा हुसैन में शहादत पर ऑनलाइन मजलिस हुई।
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साकिब रजा ने पेशख्वानी, तो मौलाना आबिद अली रिजवी ने मजलिस को खेताब किया। उम्मुल बनीन सोसाइटी के महासचिव व अंजुमन गुंचा -ए -कासिमियां के प्रवक्ता सैयद मोहम्मद अस्करी के मुताबिक सभी अजाखानों से उठने वाले जुलूस को सरकार की गाइड लाइन और मरजा -ए -वक्त की गाइड लाइन पर अमल करते हुए नहीं निकाला गया। मजलिस में मौलाना रजी हैदर, मौलाना डॉ रिजवान हैदर रिजवी,नजीब इलाहाबादी,आफताब रिजवी, वकार रिजवी, सैयद मोहम्मद अस्करी, मंजर कर्रार, सैयद अजादार हुसैन, रौनक सफीद पुरी, शबी हसन, रिजवान जव्वादी, सलमान हैदर रिजवी, काशान रिजवी, जामिन हसन उपस्थित थे।