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युवा रचनाकारों के लिए प्रेरणा हैं बच्चन
अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 28 Nov 2016 01:50 AM IST
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कालजयी रचना ‘मधुशाला’ के प्रणेता कवि हरिवंश राय बच्चन की जयंती पर रविवार को उनकी स्मृतियां सहेजी गईं। अनेक संस्थाओं की ओर से आयोजित विविध संगोष्ठियों में उनके जीवन के अनेक अनछुए पहलुओं सहित साहित्य में उनके योगदान पर चर्चा की गई। मधुशाला का पाठ भी किया गया। इंडियन प्रेस और पं.देवीदत्त शुक्ल-पं.रमादत्त शुक्ल शोध संस्थान की ओर से बच्चन जयंती पर जगत तारन गर्ल्स डिग्री कॉलेज में ‘प्रयाग नगरी, सरस्वती पत्रिका तथा बच्चन’ विषयक संगोष्ठी में डॉ. मुश्ताक अली ने ‘सरस्वती’ पत्रिका और बच्चन के अंतरसंबंधों को विश्लेषित किया।
कहा, ‘मधुशाला’ का प्रकाशन 1935 में हुआ जबकि ‘सरस्वती’ में संपादक पं.देवीदत्त शुक्ल और श्रीनाथ ने उसे 1933 में ही प्रोत्साहन स्वरूप प्रकाशित किया था। केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के डॉ.देवेंद्र शुक्ल ने कहा, चीन में लाउत्से और बच्चन का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है। भाषाविद् डॉ.पृथ्वीनाथ पांडेय ने कहा, बच्चन को पद्य तक सीमित करके देखना उनका एकपक्षीय मूल्यांकन है। इसी क्रम में ज्योतिर्विद् डॉ.रामनरेश त्रिपाठी, समाजशास्त्री डॉ.रवि कुमार मिश्र ने बच्चन की साहित्यिक सेवाओं का उल्लेख किया। प्राचार्य डॉ.कमला दुबे ने बच्चन से जुड़े विविध प्रसंग सुनाए। संचालन डॉ.वीरेंद्र कुमार तिवारी, आभार ज्ञापन इंडियन प्रेस प्रबंधक कल्याण कुमार घोष और संयोजन व्रतशील शर्मा ने किया।
प्रयागराज सेवा समिति की ओर से भी बच्चन की याद में हए कार्यक्रम में कवि विष्णु दयाल श्रीवास्तव ने मधुशाला से एक मुक्तक ‘मैं तो कायस्थ कुलोद भव में जन्मा, मेरे पुरखों ने इतना है ढाला’ सुनाकर तालियां बटोरीं। चिरकुट इलाहाबादी, तीर्थराज पांडेय ने कहा, बच्चन जी की रचनाएं बेमिसाल हैं। आरंभ में अमिताभ बच्चन के भतीजे किशोर राम चंद्र और संस्था अध्यक्ष पं.धर्मराज पांडेय ने बच्चन जी के चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम में केसी पांडेय, गुरुदयाल श्रीवास्तव, कुलभास्कर, भक्तराज आदि मौजूद रहे।
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शलभ संस्था की ओर से चक जीरो रोड में हुए कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.सुरेंद्र वर्मा ने बच्चन की रचना निशा निमंत्रण पर चर्चा की। कार्यक्रम अध्यक्ष अधिवक्ता गोपाल दास सिन्हा ने मधुशाला का पाठ किया और बच्चनजी से जुड़े कई संस्मरण सुनाए। संस्था अध्यक्ष देवेंद्र श्रीवास्तव ने बच्चन के कटघर एवं चक स्थित आवास से जुड़े संस्मरण साझा किए। विशिष्ट अतिथि नाट्यकर्मी राकेश श्रीवास्तव ने कहा, बच्चन की अनेक रचनाएं कालजयी हैं। कवि सम्मेलन में संध्या निगम, राजीव निगम, तलब जौनपुरी, ओमप्रकाश, वीरेंद्र तिवारी, कविता उपाध्याय, दीपांकर भट्टाचार्य,सुनीता सिन्हा ने रचनापाठ किया।
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कहा, ‘मधुशाला’ का प्रकाशन 1935 में हुआ जबकि ‘सरस्वती’ में संपादक पं.देवीदत्त शुक्ल और श्रीनाथ ने उसे 1933 में ही प्रोत्साहन स्वरूप प्रकाशित किया था। केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के डॉ.देवेंद्र शुक्ल ने कहा, चीन में लाउत्से और बच्चन का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है। भाषाविद् डॉ.पृथ्वीनाथ पांडेय ने कहा, बच्चन को पद्य तक सीमित करके देखना उनका एकपक्षीय मूल्यांकन है। इसी क्रम में ज्योतिर्विद् डॉ.रामनरेश त्रिपाठी, समाजशास्त्री डॉ.रवि कुमार मिश्र ने बच्चन की साहित्यिक सेवाओं का उल्लेख किया। प्राचार्य डॉ.कमला दुबे ने बच्चन से जुड़े विविध प्रसंग सुनाए। संचालन डॉ.वीरेंद्र कुमार तिवारी, आभार ज्ञापन इंडियन प्रेस प्रबंधक कल्याण कुमार घोष और संयोजन व्रतशील शर्मा ने किया।
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प्रयागराज सेवा समिति की ओर से भी बच्चन की याद में हए कार्यक्रम में कवि विष्णु दयाल श्रीवास्तव ने मधुशाला से एक मुक्तक ‘मैं तो कायस्थ कुलोद भव में जन्मा, मेरे पुरखों ने इतना है ढाला’ सुनाकर तालियां बटोरीं। चिरकुट इलाहाबादी, तीर्थराज पांडेय ने कहा, बच्चन जी की रचनाएं बेमिसाल हैं। आरंभ में अमिताभ बच्चन के भतीजे किशोर राम चंद्र और संस्था अध्यक्ष पं.धर्मराज पांडेय ने बच्चन जी के चित्र पर माल्यार्पण किया। कार्यक्रम में केसी पांडेय, गुरुदयाल श्रीवास्तव, कुलभास्कर, भक्तराज आदि मौजूद रहे।
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शलभ संस्था की ओर से चक जीरो रोड में हुए कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.सुरेंद्र वर्मा ने बच्चन की रचना निशा निमंत्रण पर चर्चा की। कार्यक्रम अध्यक्ष अधिवक्ता गोपाल दास सिन्हा ने मधुशाला का पाठ किया और बच्चनजी से जुड़े कई संस्मरण सुनाए। संस्था अध्यक्ष देवेंद्र श्रीवास्तव ने बच्चन के कटघर एवं चक स्थित आवास से जुड़े संस्मरण साझा किए। विशिष्ट अतिथि नाट्यकर्मी राकेश श्रीवास्तव ने कहा, बच्चन की अनेक रचनाएं कालजयी हैं। कवि सम्मेलन में संध्या निगम, राजीव निगम, तलब जौनपुरी, ओमप्रकाश, वीरेंद्र तिवारी, कविता उपाध्याय, दीपांकर भट्टाचार्य,सुनीता सिन्हा ने रचनापाठ किया।