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विहिप की धर्मसंसद में शामिल हुए थे हंसदेवाचार्य
Sat, 23 Feb 2019 01:24 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 23 Feb 2019 01:24 AM IST
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hans devacharya
- फोटो : अमर उजाला, प्रयागराज
जगतगुरू रामानुजाचार्य हंसदेवाचार्य के निधन पर विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने शोक जताया है। सड़क दुर्घटना में उनके निधन की सूचना मिलते ही विहिप के कुंभ मेला शिविर में शोक की लहर दौड़ गई। यहां एक शोक सभा भी हुई। इसमें कहा गया कि 31 जनवरी और एक फरवरी को हुई विहिप की धर्मसंसद में हंसदेवाचार्य जी शामिल हुए थे।
वह हिंदू समाज के पुरोधा रहे। विहिप के प्रांत संगठन मंत्री मुकेश जी ने कहा कि रामजन्मभूमि आंदोलन, विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा, गंगा की निर्मलता, रामसेतु रक्षा के लिए वे अब तक हजारों सभाएं कर चुके हैं। उनकी प्रबल इच्छा थी कि अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण हो। इसकी बाधाएं दूर हो इसके लिए उन्होंने पिछले दिनों गंगा का पूजा अर्चन भी किया था। इस अवसर पर सुनील सिंह, विमल प्रकाश, आरएम गोयल, अजय गुप्ता, अमित पाठक, सुशील राय, नवीन जायसवाल, दीनानाथ वर्मा, अभिषेक पाठक, अभय वर्मा, अश्विनी मिश्र आदि मौजूद रहे।
रामानंदाचार्य जगद्गुरु स्वामी हंसदेवाचार्य का जाना अखाड़ों सहित विभिन्न मत, पंथ, संप्रदाय के संतों को आहत कर गया है। बता दें, प्रयागराज से हरिद्वार जाते हुए सड़क हादसे में घायल होने के बाद उन्हें लखनऊ ले जाया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार हरिद्वार में किया जाएगा। उनके नहीं रहने की खबर फैलते ही संत समाज स्तब्ध रह गया।
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महामंडलेश्वर माधवदास त्यागी भक्तमाल बड़ा अखाड़ा, योगगुरु स्वामी आनंद गिरि, राममोहन रामायणी, संत समिति के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष महामंडलेश्वर सरजू, प्रदेश संरक्षक महंत राम सुरेश दास, राधे बाबा, महंत रामस्वरूप दास, महामंत्री महंत दीपक पुरी, महंत रामकृष्ण दास,श्याम दास जी मुड़िया महादेव श्याम दास,महंत घनश्याम दास,भगवानदास जी, महंत रामेश्वर दास आदि ने उनके जाने पर दुख व्यक्त किया है। फूलचंद्र दुबे ने कहा, वह मनीषी और मिलनसार थे, उनका जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। धर्मनगरी के राजेश पाठक ने कहा, पूरे मेले के दौरान वह लगातार सक्रिय रहे।
जगद्गुरु का जाना संत समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। वह सहज और श्रेष्ठ संत थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
0 महंत नरेंद्र गिरि, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष
वह बहुत सरल स्वभाव और मिलनसार थे। उन्होंने मन में कभी भी कोई बात नहीं रखी। यहां उन्होंने आश्रम बनाने की भी इच्छा व्यक्त की थी। ईश्वर उनके संकल्प को पूरा करे।
0 महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, निर्मल अखाड़ा
गोरक्षा, राष्ट्र रक्षा सहित श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के लिए आंदोलन में अग्रिम पंक्ति में रहकर आजीवन संघर्ष करते हुए सनातन संस्कृति एवं परंपरा को मजबूती दी।
0 शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती
कर्मठता की जीवंत मूर्ति. उत्साह का पारावार और जूझने की अतुल्य शक्ति उन्हें विशिष्ट बनाती थी। उन्हें अभी धर्मक्षेत्र को बड़े अवदान देने थे । उनका जाना हम सब पर वज्रपात है ।
0 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
विश्वास नहीं हो रहा है कि परमपूज्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी नहीं रहे। इस महान संत की असामयिक मृत्यु से देश व समाज कीअपूरणीय क्षति हुई है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
0 सिद्धार्थनाथ सिंह, कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
तीर्थपुरोहितों ने जताया शोक
हाथी वाले तीर्थपुरोहित कृष्णानंद की अध्यक्षता में हुई सभा में तीर्थपुरोहितों उमेश शर्मा, घनश्याम शर्मा, माधवानंद शर्मा, हीरामणि भारद्वाज आदि ने शोक संवेदना व्यक्त की। हरी मछली निशान वाले तीर्थपुरोहित राजेंद्र पालीवाल ने कहा, जगद्गुरु के जाने से सभी स्तब्ध हैं।
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वह हिंदू समाज के पुरोधा रहे। विहिप के प्रांत संगठन मंत्री मुकेश जी ने कहा कि रामजन्मभूमि आंदोलन, विश्व मंगल गौ ग्राम यात्रा, गंगा की निर्मलता, रामसेतु रक्षा के लिए वे अब तक हजारों सभाएं कर चुके हैं। उनकी प्रबल इच्छा थी कि अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण हो। इसकी बाधाएं दूर हो इसके लिए उन्होंने पिछले दिनों गंगा का पूजा अर्चन भी किया था। इस अवसर पर सुनील सिंह, विमल प्रकाश, आरएम गोयल, अजय गुप्ता, अमित पाठक, सुशील राय, नवीन जायसवाल, दीनानाथ वर्मा, अभिषेक पाठक, अभय वर्मा, अश्विनी मिश्र आदि मौजूद रहे।
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रामानंदाचार्य जगद्गुरु स्वामी हंसदेवाचार्य का जाना अखाड़ों सहित विभिन्न मत, पंथ, संप्रदाय के संतों को आहत कर गया है। बता दें, प्रयागराज से हरिद्वार जाते हुए सड़क हादसे में घायल होने के बाद उन्हें लखनऊ ले जाया गया जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार हरिद्वार में किया जाएगा। उनके नहीं रहने की खबर फैलते ही संत समाज स्तब्ध रह गया।
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महामंडलेश्वर माधवदास त्यागी भक्तमाल बड़ा अखाड़ा, योगगुरु स्वामी आनंद गिरि, राममोहन रामायणी, संत समिति के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष महामंडलेश्वर सरजू, प्रदेश संरक्षक महंत राम सुरेश दास, राधे बाबा, महंत रामस्वरूप दास, महामंत्री महंत दीपक पुरी, महंत रामकृष्ण दास,श्याम दास जी मुड़िया महादेव श्याम दास,महंत घनश्याम दास,भगवानदास जी, महंत रामेश्वर दास आदि ने उनके जाने पर दुख व्यक्त किया है। फूलचंद्र दुबे ने कहा, वह मनीषी और मिलनसार थे, उनका जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। धर्मनगरी के राजेश पाठक ने कहा, पूरे मेले के दौरान वह लगातार सक्रिय रहे।
जगद्गुरु का जाना संत समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। वह सहज और श्रेष्ठ संत थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
0 महंत नरेंद्र गिरि, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष
वह बहुत सरल स्वभाव और मिलनसार थे। उन्होंने मन में कभी भी कोई बात नहीं रखी। यहां उन्होंने आश्रम बनाने की भी इच्छा व्यक्त की थी। ईश्वर उनके संकल्प को पूरा करे।
0 महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, निर्मल अखाड़ा
गोरक्षा, राष्ट्र रक्षा सहित श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के लिए आंदोलन में अग्रिम पंक्ति में रहकर आजीवन संघर्ष करते हुए सनातन संस्कृति एवं परंपरा को मजबूती दी।
0 शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती
कर्मठता की जीवंत मूर्ति. उत्साह का पारावार और जूझने की अतुल्य शक्ति उन्हें विशिष्ट बनाती थी। उन्हें अभी धर्मक्षेत्र को बड़े अवदान देने थे । उनका जाना हम सब पर वज्रपात है ।
0 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
विश्वास नहीं हो रहा है कि परमपूज्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी नहीं रहे। इस महान संत की असामयिक मृत्यु से देश व समाज कीअपूरणीय क्षति हुई है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
0 सिद्धार्थनाथ सिंह, कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
तीर्थपुरोहितों ने जताया शोक
हाथी वाले तीर्थपुरोहित कृष्णानंद की अध्यक्षता में हुई सभा में तीर्थपुरोहितों उमेश शर्मा, घनश्याम शर्मा, माधवानंद शर्मा, हीरामणि भारद्वाज आदि ने शोक संवेदना व्यक्त की। हरी मछली निशान वाले तीर्थपुरोहित राजेंद्र पालीवाल ने कहा, जगद्गुरु के जाने से सभी स्तब्ध हैं।