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साढ़े बारह बजे बंद हो गया गैस्ट्रो की ओपीडी का दरवाजा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 08 Aug 2015 01:33 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय की गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष का मामला सामने आया ही था। विभाग की एक और प्रोफेसर ओपीडी में निर्धारित टाइम तक नहीं बैठती हैं। शुक्रवार को कई मरीजों ने इसकी शिकायत की। वह शुक्रवार को ओपीडी में केवल दो घंटे ही बैठीं। इसके अलावा कॉलेज की ओपीडी से एक-दो और डॉक्टर गायब मिले।
फतेहपुर जिले के धाता इलाके से आईं प्रभा देवी (60) ने बताया कि उनके पेट में कई दिनों से तकलीफ थी। वह एसआरएन में प्रो. मनीषा द्विवेदी को दिखाने आईं थीं, लेकिन वह नहीं मिलीं। जूनियर डॉक्टर बैठे थे। जूनियर डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने बताया कि प्रो. द्विवेदी चली गईं। प्रभा ने बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इसके पहले भी वह आईं थीं, उस दिन भी प्रो. द्विवेदी नहीं मिलीं।
प्रभा चिकित्सालय की ओपीडी में 12.15 बजे पहुंची थीं। प्रभा देवी के साथ उनका बेटा अशोक कुमार भी आया हुआ था। उसे भी पेट में परेशानी थी। उसने भी बताया कि वह कई बार ओपीडी में आया है प्रो. द्विवेदी हर बार नहीं मिली। ओपीडी में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि वह 12 बजे के बाद चली जाती हैं। इसी तरह की शिकायत गाजीपुर से आए मरीज जगदीश्वर प्रसाद ने भी की। कई मरीजों ने यह बताया कि प्रो. द्विवेदी ऐसा ही करती हैं। वह दो घंटे से ज्यादा ओपीडी में नहीं बैठती हैं। अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि प्रो. द्विवेदी का भी ओपीडी में बैठने का सिलसिला भी पिछले चार-पांच सालों से ऐसा ही है। वह भी ओपीडी में दो घंटे से ज्यादा नहीं बैठती हैं।
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शुक्रवार को मेडिसिन की ओपीडी में 12.30 बजे प्रो. द्विवेदी के अलावा डॉ. आरके यादव भी नहीं नजर आए। हालांकि उनकी ओपीडी का चैंबर खुला था। जूनियर डॉक्टर मरीज देख रहे थे, लेकिन वह ओपीडी में नहीं थे। कर्नलगंज इलाके से आए मरीज देवेश, चंदन, राकेश ने बताया कि वह भी डॉ. यादव को ही दिखाने आए थे। उनके न होने पर उन्होंने दूसरे डॉक्टर को दिखाया। इसके अलावा मेडिसिन की ओपीडी में डॉ. अनुभा, डॉ. पूनम, डॉ. आदर्श आदि डॉक्टर मरीज देखते नजर आए। सर्जरी विभाग, आर्थो, ईएनटी की ओपीडी भी दो बजे तक चली।
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फतेहपुर जिले के धाता इलाके से आईं प्रभा देवी (60) ने बताया कि उनके पेट में कई दिनों से तकलीफ थी। वह एसआरएन में प्रो. मनीषा द्विवेदी को दिखाने आईं थीं, लेकिन वह नहीं मिलीं। जूनियर डॉक्टर बैठे थे। जूनियर डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने बताया कि प्रो. द्विवेदी चली गईं। प्रभा ने बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ। इसके पहले भी वह आईं थीं, उस दिन भी प्रो. द्विवेदी नहीं मिलीं।
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प्रभा चिकित्सालय की ओपीडी में 12.15 बजे पहुंची थीं। प्रभा देवी के साथ उनका बेटा अशोक कुमार भी आया हुआ था। उसे भी पेट में परेशानी थी। उसने भी बताया कि वह कई बार ओपीडी में आया है प्रो. द्विवेदी हर बार नहीं मिली। ओपीडी में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि वह 12 बजे के बाद चली जाती हैं। इसी तरह की शिकायत गाजीपुर से आए मरीज जगदीश्वर प्रसाद ने भी की। कई मरीजों ने यह बताया कि प्रो. द्विवेदी ऐसा ही करती हैं। वह दो घंटे से ज्यादा ओपीडी में नहीं बैठती हैं। अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि प्रो. द्विवेदी का भी ओपीडी में बैठने का सिलसिला भी पिछले चार-पांच सालों से ऐसा ही है। वह भी ओपीडी में दो घंटे से ज्यादा नहीं बैठती हैं।
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शुक्रवार को मेडिसिन की ओपीडी में 12.30 बजे प्रो. द्विवेदी के अलावा डॉ. आरके यादव भी नहीं नजर आए। हालांकि उनकी ओपीडी का चैंबर खुला था। जूनियर डॉक्टर मरीज देख रहे थे, लेकिन वह ओपीडी में नहीं थे। कर्नलगंज इलाके से आए मरीज देवेश, चंदन, राकेश ने बताया कि वह भी डॉ. यादव को ही दिखाने आए थे। उनके न होने पर उन्होंने दूसरे डॉक्टर को दिखाया। इसके अलावा मेडिसिन की ओपीडी में डॉ. अनुभा, डॉ. पूनम, डॉ. आदर्श आदि डॉक्टर मरीज देखते नजर आए। सर्जरी विभाग, आर्थो, ईएनटी की ओपीडी भी दो बजे तक चली।