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थाने में अवैध निरुद्धि को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका, हाईकोर्ट ने दो दिन में सरकार से मांगा जवाब
Sun, 11 Jul 2021 10:45 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 11 Jul 2021 10:45 PM IST
सार
30 जून को शहर के मशहूर डॉक्टर का मोबाइल फोन छीनने के संदेह में गिरफ्तार युवक को चार दिन से प्रयागराज के कैंट थाने में बैठाने के खिलाफ दाखिल याचिका की सुनवाई करने के लिए रविवार को अदालत बैठी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
30 जून को शहर के मशहूर डॉक्टर का मोबाइल फोन छीनने के संदेह में गिरफ्तार युवक को चार दिन से प्रयागराज के कैंट थाने में बैठाने के खिलाफ दाखिल याचिका की सुनवाई करने के लिए रविवार को अदालत बैठी। धूमनगंज के राज केशरवानी की मां की फरियाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्पेशल पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई की।
एजीए मुर्तजा अली और अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने कोर्ट को बताया कि 30 जून को सिविल लाइंस थाने में दर्ज केस के सिलसिले में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एसओजी ने गिरफ्तार किया है और रविवार 11 जुलाई को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया है। वकीलों का कहना था कि सभी संबंधित दस्तावेज अगली सुनवाई पर पेश कर दिए जाएंगे।
इस पर कोर्ट ने कहा प्रथम दृष्टया अवैध निरुद्धि नहीं लगती। राज्य सरकार से दो दिन में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति समिति गोपाल की विशेष खंडपीठ ने सुमन केशरवानी की पत्र बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची के अधिवक्ता ऋतेश श्रीवास्तव का कहना है कि 7 जुलाई को याची का 8 बजे शाम दरवाजे से अपहरण कर लिया गया। धूमनगंज थानाध्यक्ष से मां ने फरियाद की। कोई जवाब नहीं मिला। आठ जुलाई को पता चला कैंट थाने के टार्चर रूम में रखा गया है। कैंट थाने ने कोई जवाब नहीं दिया कि मजिस्ट्रेट के सामने क्यों पेश नहीं कर रहे। 10 जुलाई को पुलिस को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की मांग भी की गई। 112 पर पुलिस को डायल किया गया। किन्तु कोई सुनवाई नही हुई।
एसएचओ सिविल लाइंस कैंट थाने में गए भी। कहा, वे कैंट थाना इंचार्ज नहीं है। उसके बेटे को किस केस में गिरफ्तार किया गया है, पुलिस नहीं बता रही थी तो हाईकोर्ट को पत्र लिखकर पुलिस की अवैध निरुद्धि से कोर्ट में पेश करने की गुहार लगाई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी ने स्पेशल पीठ गठित की। पत्र याचिका सरकारी अधिवक्ता को दी गई थी। रविवार को विशेष खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई की।
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एजीए मुर्तजा अली और अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने कोर्ट को बताया कि 30 जून को सिविल लाइंस थाने में दर्ज केस के सिलसिले में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एसओजी ने गिरफ्तार किया है और रविवार 11 जुलाई को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया है। वकीलों का कहना था कि सभी संबंधित दस्तावेज अगली सुनवाई पर पेश कर दिए जाएंगे।
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इस पर कोर्ट ने कहा प्रथम दृष्टया अवैध निरुद्धि नहीं लगती। राज्य सरकार से दो दिन में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति समिति गोपाल की विशेष खंडपीठ ने सुमन केशरवानी की पत्र बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची के अधिवक्ता ऋतेश श्रीवास्तव का कहना है कि 7 जुलाई को याची का 8 बजे शाम दरवाजे से अपहरण कर लिया गया। धूमनगंज थानाध्यक्ष से मां ने फरियाद की। कोई जवाब नहीं मिला। आठ जुलाई को पता चला कैंट थाने के टार्चर रूम में रखा गया है। कैंट थाने ने कोई जवाब नहीं दिया कि मजिस्ट्रेट के सामने क्यों पेश नहीं कर रहे। 10 जुलाई को पुलिस को पत्र लिखकर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की मांग भी की गई। 112 पर पुलिस को डायल किया गया। किन्तु कोई सुनवाई नही हुई।
एसएचओ सिविल लाइंस कैंट थाने में गए भी। कहा, वे कैंट थाना इंचार्ज नहीं है। उसके बेटे को किस केस में गिरफ्तार किया गया है, पुलिस नहीं बता रही थी तो हाईकोर्ट को पत्र लिखकर पुलिस की अवैध निरुद्धि से कोर्ट में पेश करने की गुहार लगाई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी ने स्पेशल पीठ गठित की। पत्र याचिका सरकारी अधिवक्ता को दी गई थी। रविवार को विशेष खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई की।