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Gyanvapi Case: भगवान विश्वेश्वरनाथ के पास है मंदिर के स्वामित्व और बंदोबस्त का अधिकार 

Fri, 20 May 2022 09:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 20 May 2022 09:14 PM IST
सार

दोपहर 12 बजे से शुरू हुई सुनवाई आधे घंटे से अधिक चली। कोर्ट के पास समय की कमी के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी। इस वजह से सुनवाई के लिए छह जुलाई का समय निर्धारित किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने पहले से पारित अंतरिम आदेश को 31 जुलाई 2022 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।

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Gyanvapi Case: Lord Vishweshwarnath has the right of ownership and settlement of the temple
श्री काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी मस्जिद व विश्वेश्वरनाथ मंदिर विवाद मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रही। मंदिर पक्ष की ओर तर्क दिया गया कि विश्वेश्वरनाथ मंदिर का स्वामित्व और बंदोबस्त का अधिकार भगवान विश्वेश्वरनाथ या काशी विश्वनाथ में समाहित है।

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इसका उल्लेख श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम 1983 की धारा में किया गया है। यह तर्क दिया गया कि जो लिंग इस मंदिर में स्थित है, स्वयंभू है और ज्योतिर्लिंग भी है। ज्योतिर्लिंग का लंबा धार्मिक इतिहास है, जिसका उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। अंजुमने इंतजामिया मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी।
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दोपहर 12 बजे से शुरू हुई सुनवाई आधे घंटे से अधिक चली। कोर्ट के पास समय की कमी के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी। इस वजह से सुनवाई के लिए छह जुलाई का समय निर्धारित किया है। इसके साथ ही कोर्ट ने पहले से पारित अंतरिम आदेश को 31 जुलाई 2022 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई दिन-प्रतिदिन के आधार पर तब तक जारी रहेगी जब तक कि दलीलें समाप्त नहीं हो जातीं। 

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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम 1983 को सुप्रीम कोर्ट ने बताया है वैध
इसके पूर्व मंदिर की ओर से अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने पक्ष रखा। अधिवक्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित उत्तर प्रदेश श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम (1983) 28 जनवरी 1983 को लागू हुआ। उन्होंने कहा इस अधिनियम की धारा 4 और 9 में मंदिर को परिभाषित किया गया है। विश्वेश्वरनाथ मंदिर का अर्थ है आदि विश्वेश्वर का मंदिर, जिसे लोकप्रिय रूप से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है, जो वाराणसी शहर में स्थित है, जिसका उपयोग सार्वजनिक धार्मिक पूजा के स्थान के रूप में किया जाता है।


मंदिर की भूमि पर स्थापित सभी अधीनस्थ मंदिरों, उपमंदिरों, मंडपों, कुओं, तालाबों पर हिंदुओं का अधिकार है। तर्क दिया गया है कि अधिनियम 1983 की वैधता को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अधिनियम 1983 की वैधता की पुष्टि की। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता की ओर से  बहस के बाद कोर्ट ने दोनों पक्षाें की सहमति से मामले की सुनवाई केलिए छह जुलाई की तिथि तय कर दी।

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