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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Gyanvapi Case: Hearing on petition demanding sealing of Gyanvapi, stopping entry of non-Hindus on August 8

Gyanvapi Case : ज्ञानवापी को सील करने, गैर हिंदुओं का प्रवेश रोकने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई आठ अगस्त को

Fri, 04 Aug 2023 11:24 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 04 Aug 2023 11:24 PM IST
सार

इस जनहित याचिका में कहा गया है कि श्रृंगार गौरी केस में जब तक वाराणसी जिला अदालत का फैसला नहीं आ जाता तब तक परिसर में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए और ज्ञानवापी परिसर में मिले हिंदू प्रतीक चिन्हों को संरक्षित रखने का आदेश दिया जाए।

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Gyanvapi Case: Hearing on petition demanding sealing of Gyanvapi, stopping entry of non-Hindus on August 8
इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी ज्ञानवापी सर्वे मामले की सुनवाई। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर को सील करने और गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट आठ अगस्त को सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट में यह याचिका राखी सिंह व अन्य की तरफ से बुधवार को दाखिल की गई थी। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ सुनवाई करेगी।

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इस जनहित याचिका में कहा गया है कि श्रृंगार गौरी केस में जब तक वाराणसी जिला अदालत का फैसला नहीं आ जाता तब तक परिसर में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए और ज्ञानवापी परिसर में मिले हिंदू प्रतीक चिन्हों को संरक्षित रखने का आदेश दिया जाए। कोर्ट से यह भी मांग की गई है कि इस तरह की व्यवस्था की जाए जिससे ज्ञानवापी में एएसआई सर्वेक्षण का काम प्रभावित न हो।

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याचियों ने अपनी जनहित याचिका को अपने अधिवक्ता के माध्यम से इलाहाबाद हाईकोर्ट की रजिस्ट्री विभाग के जरिए दाखिल किया है। इसमें कहा गया था कि वाराणसी में श्री आदि विश्वेश्वर मंदिर (वर्तमान ज्ञानवापी परिसर) के सदियों पुराने अवशेषों को बचाना है। दावा किया गया है कि विवादित स्थल (सेटलमेंट प्लॉट नंबर 9130 वार्ड और दशाश्वमेघ वाराणसी) पर एक भव्य मंदिर हुआ करता था, जहां भगवान शिव ने स्वयं ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।

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1669 में औरंगजेब ने नष्ट कराया था मंदिर

सन 1669 में मुस्लिम शासक औरंगजेब ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया। कहा गया है कि उक्त मंदिर को नष्ट करने के बाद मुसलमानों ने अनधिकृत रूप से मंदिर परिसर में अतिक्रमण किया और एक संरचना बनाई जो कि कथित ज्ञानवापी मस्जिद हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि मूल ज्योतिर्लिंग अनधिकृत रूप से बनाई गई इस संरचना के नीचे स्थित है।

हिंदू भक्तों को पुराने मंदिर परिसर के भीतर शिवलिंग के दर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है। यदि कोई व्यक्ति या लोग जबरन और कानून के अधिकार के बिना उस संपत्ति के भीतर या किसी विशेष स्थान पर नमाज पढ़ते हैं, तो उसे मस्जिद नहीं कहा जा सकता है। इसके अलावा याचिका में ज्ञानवापी परिसर के अंदर कुछ सबूतों, दीवारों पर चिह्नों / प्रतीकों और खंभों का हवाला देते हुए तर्क दिया गया है कि ये पुराने हिंदू मंदिर का हिस्सा हैं और वर्तमान संरचना मस्जिद के चबूतरे और आधार पर खड़ी है।

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