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जीएसटी में व्यापारियों के लिए अड़चन बनेंगे अफसर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 13 Jul 2016 01:05 AM IST
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- फोटो : income tax
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लोकसभा के मानसून सत्र में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) पर फैसला होने की पूरी उम्मीद है। इसके मद्देनजर प्रदेश सरकार भी अपने स्तर से तैयारी में जुटी है। व्यापारियों को जीएसटी का पूरा लाभ मिल सके, इसके लिए उनके पैन वेलीडेशन का आदेश अफसरों को दिया गया लेकिन वाणिज्य कर विभाग के अफसरों की मनमानी से जीएसटी लागू होने पर व्यापारियों को इसका लाभ मिलने में अड़चन खड़ी हो सकती है, क्योंकि पूरे प्रदेश में अब तक बड़ी संख्या में व्यापारियों के पैन वेलीडेशन का काम पूरा ही नहीं हो सका है। अब वाणिज्य कर कमिश्नर ने अफसरों को इसके लिए 31 अगस्त तक की मोहलत दी है।
केंद्र सरकार जीएसटी पर माथापच्ची लंबे समय से कर रही है, सो वाणिज्य कर विभाग भी अपने स्तर से काम पूरा कराने में जुटा है ताकि जीएसटी लागू होने पर व्यापारियों को लाभ मिलने में किसी तरह की दिक्कत न आए। इसके तहत सबसे पहले पैन अपडेशन का फरमान जारी किया। विभाग के अफसर इस काम में शुरू से लापरवाह रहे। मुख्यालय से लगातार आदेश के बावजूद अफसरों ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया। मुख्यालय ने पैन अपडेशन का काम नवंबर 2015 तक पूरा करने का आदेश दिया था और उसी समय तक एनएसडीएल की साइट पर भी अपलोड करने का फरमान जारी किया ताकि जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत पंजीकृत व्यापारियों का सही पैन अभिलेखों में दर्ज हो सके लेकिन पूरे प्रदेश में इस काम को लेकर लापरवाह रहे अफसरों ने पैन वेलीडेशन का काम पूरा नहीं किया।
इससे वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश मेश्राम का पारा चढ़ गया। उन्होंने चार दिन पहले जारी आदेश में पैन अपडेशन का काम गंभीरता पूर्वक न करने पर एडीशनल कमिश्नर, ज्वाइंट कमिश्नर कार्यपालक कारपोरेट सेल एवं कर निर्धारण अधिकारियों को फटकार लगाई है। यह भी कहा है कि प्रस्तावित जीएसटी के अंतर्गत पंजीयन के लिए व्यापारी का सही पैन अभिलेखों में अंकित होना अति आवश्यक है। एआईएस की ओर से बताया गया है कि पैन वेरीफिकेशन प्रक्रिया में पूरे प्रदेश में 101227 पैन इनवेलिड पाए गए हैं।
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उन्होंने अफसरों को सख्त हिदायत दी है कि व्यापारियों के डेटा को जीएसटीएन पर माइग्रेट करने से पहले विभागीय डेटाबेस में अंकित पैन का तीन स्तरों पर सत्यापन करें। उन्होंने सत्यापन प्रक्रिया का पूरा ब्योरा भी उपलब्ध कराया है। कमिश्नर ने कहा है कि यदि 31 अगस्त के बाद भी डीलर्स अपना पैन अपडेट नहीं कराते हैं तो सम्यक सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए टिन निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाए।
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केंद्र सरकार जीएसटी पर माथापच्ची लंबे समय से कर रही है, सो वाणिज्य कर विभाग भी अपने स्तर से काम पूरा कराने में जुटा है ताकि जीएसटी लागू होने पर व्यापारियों को लाभ मिलने में किसी तरह की दिक्कत न आए। इसके तहत सबसे पहले पैन अपडेशन का फरमान जारी किया। विभाग के अफसर इस काम में शुरू से लापरवाह रहे। मुख्यालय से लगातार आदेश के बावजूद अफसरों ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया। मुख्यालय ने पैन अपडेशन का काम नवंबर 2015 तक पूरा करने का आदेश दिया था और उसी समय तक एनएसडीएल की साइट पर भी अपलोड करने का फरमान जारी किया ताकि जीएसटी प्रणाली के अंतर्गत पंजीकृत व्यापारियों का सही पैन अभिलेखों में दर्ज हो सके लेकिन पूरे प्रदेश में इस काम को लेकर लापरवाह रहे अफसरों ने पैन वेलीडेशन का काम पूरा नहीं किया।
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इससे वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश मेश्राम का पारा चढ़ गया। उन्होंने चार दिन पहले जारी आदेश में पैन अपडेशन का काम गंभीरता पूर्वक न करने पर एडीशनल कमिश्नर, ज्वाइंट कमिश्नर कार्यपालक कारपोरेट सेल एवं कर निर्धारण अधिकारियों को फटकार लगाई है। यह भी कहा है कि प्रस्तावित जीएसटी के अंतर्गत पंजीयन के लिए व्यापारी का सही पैन अभिलेखों में अंकित होना अति आवश्यक है। एआईएस की ओर से बताया गया है कि पैन वेरीफिकेशन प्रक्रिया में पूरे प्रदेश में 101227 पैन इनवेलिड पाए गए हैं।
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उन्होंने अफसरों को सख्त हिदायत दी है कि व्यापारियों के डेटा को जीएसटीएन पर माइग्रेट करने से पहले विभागीय डेटाबेस में अंकित पैन का तीन स्तरों पर सत्यापन करें। उन्होंने सत्यापन प्रक्रिया का पूरा ब्योरा भी उपलब्ध कराया है। कमिश्नर ने कहा है कि यदि 31 अगस्त के बाद भी डीलर्स अपना पैन अपडेट नहीं कराते हैं तो सम्यक सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए टिन निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाए।