{"_id":"7761818c86b96e2859d0f864e4f5e8b9","slug":"grade-pay-system-would-employ-over-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्मचारी चाहते हैं खत्म हो ग्रेड-पे प्रणाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्मचारी चाहते हैं खत्म हो ग्रेड-पे प्रणाली
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 04 Mar 2015 11:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेलवे कर्मचारी छठे वेतन आयोग में घोषित ग्रेड-पे प्रणाली के नुकसान का खामियाजा आगे नहीं उठाना चाहते। कर्मचारियों की इच्छा है कि सातवें वेतन आयोग में ग्रेड-पे प्रणाली को हटा दिया जाए और पहले की तरह वेतनमान व्यवस्था बहाल की जाए। तर्क है कि ग्रेड-पे प्रणाली ने कर्मचारियों और अफसरों के वेतन में भारी फर्क पैदा कर दिया है। दोनों की तुलना में यह कर्मचारियों के लिए नुकसानदायक है। एआईआरएफ और एनएफआईआर ने इस मुद्दे को दिल्ली में हुई जेसीएम की बैठक में भी उठाया है। कर्मचारी संगठन संभावना जता रहे हैं कि सातवें वेतन आयोग में उनके पक्ष को लागू भी किया जा सकता है।
छठे वेतन आयोग ने कर्मचारियों को 1.86 का मल्टीप्लीकेशन फैक्टर दिया। साथ ही इसमें ग्रेड-पे को जोड़ दिया। पांचवें वेतन आयोग ने 3.25 का मल्टीप्लीकेशन फैक्टर दिया था। कर्मचारियों का दावा है कि चौथे वेतन आयोग में जिन कर्मचारियों का वेतन दो हजार रुपये था, पांचवें में वह बढ़कर करीब साढ़े छह हजार रुपये हो गया। जबकि, छठे वेतन आयोग में वेतन बढ़ोतरी का यह अनुपात कम रहा। एनसीआरईएस के आलोक सहगल का दावा है कि दोनों कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये की मांग की है। यह हेल्पर का वेतन है।
सीनियर हेल्पर के लिए 33 हजार रुपये मांगे गए हैं। जेसीएम (ज्वाइंट कंसलटेटिव मशीनरी) में उठाए गए मुद्दों को वेतन आयोग के सामने रखा गया है। एआईआरएफ के महासचिव व जेसीएम के प्रतिनिधि शिवगोपाल मिश्र भी मानते हैं कि ग्रेड-पे प्रणाली ने कर्मचारियों का नुकसान किया। सो, सातवें वेतन आयोग में पुरानी वेतन प्रणाली को बहाल किया जाए। जेसीएम के एजेंडे में भी यही प्रमुख मुद्दा रहा। इसमें न्यूनतम वेतन, सेवानिवृत्ति लाभ और भत्तों के भुगतान जैसे मुद्दे ही उठाए गए हैं। शिवगोपाल का मानना है कि सातवें वेतन आयोग के सामने पूरी दमदारी और तर्कों के साथ इस मांग को रखा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
छठे वेतन आयोग ने कर्मचारियों को 1.86 का मल्टीप्लीकेशन फैक्टर दिया। साथ ही इसमें ग्रेड-पे को जोड़ दिया। पांचवें वेतन आयोग ने 3.25 का मल्टीप्लीकेशन फैक्टर दिया था। कर्मचारियों का दावा है कि चौथे वेतन आयोग में जिन कर्मचारियों का वेतन दो हजार रुपये था, पांचवें में वह बढ़कर करीब साढ़े छह हजार रुपये हो गया। जबकि, छठे वेतन आयोग में वेतन बढ़ोतरी का यह अनुपात कम रहा। एनसीआरईएस के आलोक सहगल का दावा है कि दोनों कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये की मांग की है। यह हेल्पर का वेतन है।
विज्ञापन
सीनियर हेल्पर के लिए 33 हजार रुपये मांगे गए हैं। जेसीएम (ज्वाइंट कंसलटेटिव मशीनरी) में उठाए गए मुद्दों को वेतन आयोग के सामने रखा गया है। एआईआरएफ के महासचिव व जेसीएम के प्रतिनिधि शिवगोपाल मिश्र भी मानते हैं कि ग्रेड-पे प्रणाली ने कर्मचारियों का नुकसान किया। सो, सातवें वेतन आयोग में पुरानी वेतन प्रणाली को बहाल किया जाए। जेसीएम के एजेंडे में भी यही प्रमुख मुद्दा रहा। इसमें न्यूनतम वेतन, सेवानिवृत्ति लाभ और भत्तों के भुगतान जैसे मुद्दे ही उठाए गए हैं। शिवगोपाल का मानना है कि सातवें वेतन आयोग के सामने पूरी दमदारी और तर्कों के साथ इस मांग को रखा जा रहा है।
विज्ञापन