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गोविंदाचार्य बोले, सरकार बनाए गो संरक्षण मंत्रालय, गोहत्या के खिलाफ बने कानून जल्द लागू हो
Thu, 17 Sep 2020 06:51 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 17 Sep 2020 06:51 PM IST
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केएन गोविंदाचार्य (फाइल)
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व संगठन महामंत्री रहे केएन गोविंदाचार्य ने बृहस्पवितार को गाय, गंगा, गायत्री, जल, जंगल और जमीन को धरा का मूल प्राण तत्व बताया। कहा कि इनका संरक्षण किया जाना ही मानव सभ्यता को बचाए रखने के लिए आवश्यक है। कहा कि गोवंश हत्याबंदी कानून जल्द से जल्द लागू हो। साथ ही सरकार गो संरक्षण मंत्रालय का भी गठन करें।
सर्किट हाउस में प्रयागराज फाउंडेशन के अध्यक्ष शशांक शेखर पांडेय, डा प्रमोद शर्मा तथा दत्तात्रेय पांडेय के संयोजन में आयोजित प्रकृति केंद्रित विकास परिचर्चा में अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि गंगाजी की अविरलता, निर्मलता के लिए प्राकृतिक प्रवाह सुनिश्चित किया जाय। हमेशा 70 फीसदी पानी प्रवाह में रहे।
साथ ही गंगा के उच्चतम बाढ़ स्तर के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर की जमीन को गंगा क्षेत्र ही माना जाए और उसे रेवेन्यू रिकार्ड में दर्ज किया जाए। प्रकृति को नुकसान पहुंचाने पर कड़े दंड की व्यवस्था हो एवं संरक्षण पर प्रोत्साहन भी मिले। कार्यक्रम का संचालन शशांक शेखर पांडेय ने किया। इस अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच पूर्वी उत्तर प्रदेश के सह संयोजक डा वी के सिंह के साथ स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने वर्तमान परिस्थियों में स्वदेशी आंदोलन के महत्व एवं दिशा पर चर्चा की।
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इस दौरान विभाग संयोजक कैप्टन मुकेश, पूनम मिश्र, खुशबू कुशवाहा ,सुशील कुमार पाण्डेय,ओम् प्रकाश मिश्रा, सरदार पतिविंदर सिंह,अनिल पांडेय आदि उपस्थित रहे। शाम को केएन गोविन्दाचार्य उच्चशिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डा.गिरीश चन्द्र त्रिपाठी के आवास पर भी गए। यहां डा. त्रिपाठी समेत मूंछ नर्तक राजेंद्र तिवारी दुकान जी, डा. रमा सिंह एवं अन्य प्रबुद्ध जनों के साथ उनकी मुलाकात हुई। शाम को गंगा आरती में शामिल होकर बाँध पर बड़े हनुमान जी का दर्शन - पूजन भी उन्होंने किया। महंत आनंद गिरि से भी उन्होंने मुलाकात कर स्टीमर से संगम भी गए।
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सर्किट हाउस में प्रयागराज फाउंडेशन के अध्यक्ष शशांक शेखर पांडेय, डा प्रमोद शर्मा तथा दत्तात्रेय पांडेय के संयोजन में आयोजित प्रकृति केंद्रित विकास परिचर्चा में अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि गंगाजी की अविरलता, निर्मलता के लिए प्राकृतिक प्रवाह सुनिश्चित किया जाय। हमेशा 70 फीसदी पानी प्रवाह में रहे।
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साथ ही गंगा के उच्चतम बाढ़ स्तर के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर की जमीन को गंगा क्षेत्र ही माना जाए और उसे रेवेन्यू रिकार्ड में दर्ज किया जाए। प्रकृति को नुकसान पहुंचाने पर कड़े दंड की व्यवस्था हो एवं संरक्षण पर प्रोत्साहन भी मिले। कार्यक्रम का संचालन शशांक शेखर पांडेय ने किया। इस अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच पूर्वी उत्तर प्रदेश के सह संयोजक डा वी के सिंह के साथ स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने वर्तमान परिस्थियों में स्वदेशी आंदोलन के महत्व एवं दिशा पर चर्चा की।
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इस दौरान विभाग संयोजक कैप्टन मुकेश, पूनम मिश्र, खुशबू कुशवाहा ,सुशील कुमार पाण्डेय,ओम् प्रकाश मिश्रा, सरदार पतिविंदर सिंह,अनिल पांडेय आदि उपस्थित रहे। शाम को केएन गोविन्दाचार्य उच्चशिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डा.गिरीश चन्द्र त्रिपाठी के आवास पर भी गए। यहां डा. त्रिपाठी समेत मूंछ नर्तक राजेंद्र तिवारी दुकान जी, डा. रमा सिंह एवं अन्य प्रबुद्ध जनों के साथ उनकी मुलाकात हुई। शाम को गंगा आरती में शामिल होकर बाँध पर बड़े हनुमान जी का दर्शन - पूजन भी उन्होंने किया। महंत आनंद गिरि से भी उन्होंने मुलाकात कर स्टीमर से संगम भी गए।