Prayagraj : 90 साल के लिए एक रुपये किराये पर एसआरएन अस्पताल को सरकार देगी जमीन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद सरकार प्रयागराज में सुपरस्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं का सपना साकार करने जा रही है। 24 घंटे के भीतर सरकार स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल को 90 साल के लिए एक रुपये प्रतिवर्ष के पट्टे पर 31,314 वर्ग मीटर भूमि सौंपने जा रही है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद सरकार प्रयागराज में सुपरस्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं का सपना साकार करने जा रही है। 24 घंटे के भीतर सरकार स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल को 90 साल के लिए एक रुपये प्रतिवर्ष के पट्टे पर 31,314 वर्ग मीटर भूमि सौंपने जा रही है। यह जानकारी सरकार के अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने डॉ.अरविंद गुप्ता और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ को दी है। कोर्ट में पेश प्रयागराज के डीएम मनीष कुमार वर्मा ने भरोसा दिलाया है कि 24 घंटे में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य के नाम से पट्टा विलेख निष्पादित कर दिया जाएगा।
इस नए पट्टा विलेख के बाद मेडिकल कॉलेज के पास अब 50,014 वर्ग मीटर यानी करीब 12.3 एकड़ जमीन हो जाएगी। 2024 से जनहित याचिका के रूप में शुरू हुई मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी अधिकारियों की सुस्ती पर फटकार लगा रहा कोर्ट मंगलवार को संतुष्ट नजर आया। मुख्य सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि निर्माण कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है। साथ ही समयसीमा निर्धारित कर दी गई है। इसकी निगरानी खुद मुख्य सचिव भी करेंगे।
इस जानकारी के बाद कोर्ट ने सरकार और अधिकारियों की पीठ थपथपाई। कहा कि लंबे समय से लंबित परियोजना और कार्यदायी संस्था की सुस्ती के बाद जिस तरह मुख्य सचिव ने देखभाल की कमान खुद संभाली, वह काबिले तारीफ है। प्रयागराज की चिकित्सा सुविधाओं को लेकर उठाया गया सरकार का यह पहला ठोस कदम है। जो सरकार और अधिकारियों की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
कोर्ट ने चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और वर्तमान सचिव अमित कुमार घोष के प्रयासों की सराहना की। कहा कि महज 10 महीने के संक्षिप्त कार्यकाल के भीतर प्रशासनिक इच्छाशक्ति के दम पर शहर के बीच इतनी बड़ी जमीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आरक्षित की जा सकी है। 29 मई को सुनवाई होगी। इस दिन अदालत पट्टा विलेख के निष्पादन और अन्य निर्माण का कार्य की प्रगति पर समीक्षा करेगी।