Job : शासन अर्हता बताने और आयोग परीक्षा कराने से कतरा रहा, अधियाचन मिलने के बावजूद फंसी भर्तियां
महीनों बीत गए, लेकिन शासन ने कई प्रकार के पदों पर समकक्ष अर्हता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की और इसी वजह से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) भर्ती परीक्षाएं कराने से कतरा रहा है।
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महीनों बीत गए, लेकिन शासन ने कई प्रकार के पदों पर समकक्ष अर्हता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की और इसी वजह से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) भर्ती परीक्षाएं कराने से कतरा रहा है। समकक्ष अर्हता के विवाद में आधा दर्जन भर्तियां फंसी हुईं हैं।
समकक्ष अर्हता निर्धारण के लिए शासन स्तर से कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने माह भर पहले शासन को रिपोर्ट भी भेज दी, लेकिन शासन की ओर से अर्हता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। यूपीपीएससी के सूत्रों का कहना है कि इस मसले पर आयोग की ओर से शासन को कई बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अर्हता स्पष्ट न होने से भर्तियां शुरू नहीं हो पा रहीं हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर यूपीपीएससी ने शासन को समकक्ष अर्हता स्पष्ट करने के लिए पत्र लिखा था, ताकि भर्ती शुरू होने के बाद अर्हता को लेकर कोई विवाद न हो, कम से कम मामले कोर्ट में जाएं और भर्ती समय से पूरी हो सके। सवाल उठ रहे हैं कि शासन अर्हता स्पष्ट करने से क्यों कतरा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता अधिक से अधिक लोगों को रोजगार देने की है।
आयोग को एलटी ग्रेड और प्रवक्ता भर्ती के लिए पिछले साल ही तकरीबन सात हजार रिक्त पदों का अधियाचन मिल चुका है, अपर निजी सचिव (एपीएस) के भी 300 से अधिक पदों का अधियाचन आयोग के पास पड़ा हुआ है, समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) के भी कई पदों का अधियाचन मिल चुका है। वहीं, कुछ अन्य भर्तियाें को लेकर भी अर्हता स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि आयोग ने अपने स्तर से भर्ती परीक्षाएं कराने की तैयारी कर रखी है। शासन स्तर से स्थिति स्पष्ट होते ही भर्तियाें के विज्ञापन जारी कर दिए जाएंगे। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि अर्हता के विवाद में महीनों से भर्तियां अटकी हुईं हैं और छात्र ओवरएज हो रहे हैं। समिति की ओर से मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करें, ताकि भर्तियां शुरू हो सकें।