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बुंदेलखंड के गरीबों को सस्ते में भोजन पर सरकार ने साधी चुप्पी
इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 06 Mar 2018 01:15 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : amar ujala
सूखा ग्रस्त बुंदेलखंड के गरीबों को पांच और दस रुपये में भोजन कराने की योजना पर प्रदेश सरकार फिलहाल चुप है। उसने हाईकोर्ट में तय तिथि पर अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए प्रदेश सरकार को 12 मार्च को हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि लखनऊ में सरकार किस कानूनी प्रावधान या किस योजना से पांच और इस रुपये में गरीबों को भरपेट भोजन दे रही है। बुंदेलखंड के गरीबों को ऐसी सुविधा क्यों नही दी जा सकती। इस पूर्व कोर्ट ने मुख्य सचिव को इस मामले में हलफनामा दाखिल कर पक्ष रखने का निर्देश दिया था।
बुंदेलखंड हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति शशिकांत की पीठ सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा था कि बुंदेलखंड के गरीबों को पांच और दस रुपये में भोजन उपलब्ध कराने की योजना पर सरकार का पक्ष साफ करें। मुख्य सचिव ने हलफनामा दाखिल कर कानूनी उपबंधों का हवाला दिया मगर भोजन योजना पर जानकारी नहीं दी। और बताया कानून के मुताबिक सरकार गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की सहायता योजनाओं पर अमल कर रही है।
कोर्ट का कहना था कि सरकार मुफ्त अनाज सहित अन्य योजनाओं में सब्सिडी बंद कर क्यों नहीं, गरीबों को सस्ते दर पर भोजन की योजना लागू करती । कोर्ट ने कहना था कि संसद में सरकार बेहद सस्ते दर पर कैंटीन चला रही है। लखनऊ में भी दो जगहों पर पांच और रुपये में भोजन योजना शुरू की गई है। ऐसी योजना बुंदेलखंड में भी शुरू की जा सकती है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को एक और मोहलत देते हुए प्रदेश सरकार को ऐसी योजना पर अपना रुख साफ करने का समय दिया है। अगली सुनवाई 12 मार्च नियत को होगी।
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बुंदेलखंड हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति शशिकांत की पीठ सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा था कि बुंदेलखंड के गरीबों को पांच और दस रुपये में भोजन उपलब्ध कराने की योजना पर सरकार का पक्ष साफ करें। मुख्य सचिव ने हलफनामा दाखिल कर कानूनी उपबंधों का हवाला दिया मगर भोजन योजना पर जानकारी नहीं दी। और बताया कानून के मुताबिक सरकार गरीबी रेखा से नीचे के लोगों की सहायता योजनाओं पर अमल कर रही है।
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कोर्ट का कहना था कि सरकार मुफ्त अनाज सहित अन्य योजनाओं में सब्सिडी बंद कर क्यों नहीं, गरीबों को सस्ते दर पर भोजन की योजना लागू करती । कोर्ट ने कहना था कि संसद में सरकार बेहद सस्ते दर पर कैंटीन चला रही है। लखनऊ में भी दो जगहों पर पांच और रुपये में भोजन योजना शुरू की गई है। ऐसी योजना बुंदेलखंड में भी शुरू की जा सकती है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को एक और मोहलत देते हुए प्रदेश सरकार को ऐसी योजना पर अपना रुख साफ करने का समय दिया है। अगली सुनवाई 12 मार्च नियत को होगी।
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