हाईकोर्ट : पुलिस अभिरक्षा में मौत के मामले तलब किए गए गोरखपुर एसएसपी
कोर्ट ने कहा, नौ अगस्त 22 को मृतक के भाई की ओर से दर्ज एफ आईआर में याची तथा गांव वालों पर चोरी के आरोप में उसके भाई को छह अगस्त को पीटने का आरोप लगाया गया है। इससे उसकी मौत होने की बात की गई है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के एसएसपी तथा पिपराइच थाना पुलिस की अभिरक्षा में मौत मामले के विवेचना अधिकारी को पांच दिसंबर को तलब किया है। साथ ही व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा, नौ अगस्त 22 को मृतक के भाई की ओर से दर्ज एफ आईआर में याची तथा गांव वालों पर चोरी के आरोप में उसके भाई को छह अगस्त को पीटने का आरोप लगाया गया है। इससे उसकी मौत होने की बात की गई है। दूसरी तरफ याची का कहना है कि सात अगस्त 22 को रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी के समय मृतक के शरीर पर चोट नहीं थी तो छह अगस्त 22 को गांव वालों के पीटने से उसे कैसे चोटें आईं। यह विरोधाभास कैसे है। याचिका की सुनवाई पांच दिसंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सुरेश कुमार गुप्ता ने विक्रम सिंह की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
याची ने पिपराइच थाने में एक एफआईआर धारा 457, 380 भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज कराई। विवेचना के दौरान छह अगस्त 22 को पुलिस ने प्रमोद को गिरफ्तार किया। सात अगस्त को रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर सात अगस्त से 20 अगस्त की रिमांड ली।
उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल न भेजकर पुलिस अभिरक्षा में रखा गया। आठ अगस्त 22 को उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर 10 चोटें पाई गईं। इन्हीं चोटों के कारण मौत बताई गई है। पुलिस अभिरक्षा में मौत के बाद मृतक के भाई ने याची तथा गांव वालों के खिलाफ पिटाई करने से मौत का आरोप लगाया है। इससे विरोधाभास की स्थिति स्पष्ट करने के लिए एसएसपी व विवेचना अधिकारी को हाजिर होने का निर्देश दिया गया है।