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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Goddess Shailaputri worshipped on the first day of Shardiya Navratri; devotees throng the Alop Shankari Temple

नवरात्र : शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना, अलोप शंकरी मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

Sun, 11 Oct 2026 12:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 11 Oct 2026 12:39 PM IST
सार

शक्ति की उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्रि का रविवार को विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ शुभारंभ हुआ। प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना के लिए संगम नगरी प्रयागराज के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। अलोपीबाग स्थित सिद्धपीठ मां अलोप शंकरी मंदिर में भोर से ही दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की कतारें लग गईं। किसी ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की तो किसी ने मां के चरणों में अपनी मनोकामनाएं अर्पित कीं। देवी के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहा और पूरा वातावरण शक्तिभक्ति, श्रद्धा तथा आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा।

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Goddess Shailaputri worshipped on the first day of Shardiya Navratri; devotees throng the Alop Shankari Temple
शारदीय नवरात्र के पहले दिन शक्तिपीठ अलोपशंकरी मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यता है कि मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री और प्रकृति की दिव्य शक्ति का स्वरूप हैं। नवरात्रि के पहले दिन उनकी उपासना से साधक को सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है। इसी आस्था के साथ रविवार सुबह से ही प्रयागराज के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया। भक्तों ने विधि-विधान से पूजन कर मां से परिवार के कल्याण और जीवन में मंगल की कामना की।

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पालने में विराजती हैं मां अलोप शंकरी, अद्वितीय है पूजा परंपरा

अलोपीबाग स्थित मां अलोप शंकरी मंदिर की महिमा और यहां की अनूठी पूजा परंपरा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस शक्तिपीठ के गर्भगृह में देवी की पारंपरिक प्रतिमा के स्थान पर पवित्र कुंड के ऊपर लाल चुनरी से आच्छादित लकड़ी के पालने की पूजा की जाती है। भक्त इसी पालने को मां का दिव्य स्वरूप मानकर शीश नवाते हैं और अपनी श्रद्धा निवेदित करते हैं।मां के इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए नवरात्रि में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। 

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सती की देह से जुड़ी है शक्तिपीठ की पौराणिक मान्यता

पौराणिक आख्यानों के अनुसार, दक्ष यज्ञ में माता सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर शोकाकुल अवस्था में विचरण करने लगे। सृष्टि के संतुलन की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंडित किया। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सती का एक अंग अदृश्य हो गया था। इसी घटना से इस स्थान का नाम अलोप शंकरी पड़ा। माता सती की स्मृति और आदिशक्ति की महिमा से जुड़ी यह मान्यता मंदिर की धार्मिक प्रतिष्ठा को विशिष्ट बनाती है। श्रद्धालु यहां दर्शन कर स्वयं को देवी की कृपा और शक्ति से जुड़ा अनुभव करते हैं।

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रक्षासूत्र बांधकर मनोकामना मांगते हैं भक्त

मां अलोप शंकरी के दरबार में मनोकामना पूर्ति की आस्था भी गहराई से जुड़ी है। श्रद्धालु मंदिर में रक्षासूत्र बांधकर मां से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं। यहां मुंडन संस्कार सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न कराए जाते हैं। सोमवार, शुक्रवार और नवरात्रि जैसे विशेष अवसरों पर मंदिर में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है।

जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर, भक्ति में डूबी संगम नगरी

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन अलोप शंकरी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने संगम नगरी की गहरी धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा की झलक पेश की। मां के दर्शन की अभिलाषा लेकर पहुंचे भक्तों के बीच उत्साह और श्रद्धा का संगम दिखाई दिया। देवी के जयकारों और पूजा-अर्चना के बीच नवरात्रि के नौ दिनों तक चलने वाली शक्ति साधना का शुभारंभ भक्तिमय वातावरण में हुआ।

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