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दवा संग दिल से इलाज कर पा रहे दूसरे भगवान का दर्जा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 01 Jul 2016 02:06 AM IST
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डाक्टर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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एक तरफ जहां मरीजों से निजी नर्सिंग होम में लूट मची है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे डॉक्टर्स भी हैं जो अपने प्रोफेशन के साथ समाज सेवाकर दूसरे भगवान का दर्जा हासिल कर रहे हैं। खामोशी से जरुरूतमंदों की हर संभव मदद उनके मिशन का मकसद है और किसी की जान बचाना ही उनकी खुशी। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे जूनियर डॉक्टर्स अपनी ड्यूटी के साथ अस्पताल आने वाले मरीजों की सहायता भी करते हैं।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन में मेडिसिन, सर्जरी, आर्थो, ईएनटी, टीबी चेस्ट, गॉयनी समेत सभी विभागों के परास्नातक और सीनियर रेजिडेंट शामिल हैं।डॉ. विवेक, डॉ.अंकुर, डॉ.श्यामेंद्र, डॉ.अभिषेक झा, डॉ.अंकित, डॉ.जीतम, डॉ.विनोद, डॉ.अभिनव, डॉ.सोनू, डॉ.संतोष, डॉ.नीरज, डॉ.संदीप, डॉ. यशस्वी, डॉ.नेहा, डॉ.शिवांगी, डॉ.प्रीति, डॉ.शुभांगी आदि जरूरतमंद असहाय, लावारिस मरीजों की मदद को तत्पर रहते हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सिंह कहते हैं, चिकित्सालय में औसतन दो-तीन मरीजों की प्रतिदिन मदद की जाती है। इन्हें ब्लड, दवाइयां, खाने की व्यवस्था, जांच कराने में, सिटी स्कैन या फिर एमआरआई कराने में मदद करते है। इनका एक मेडिसिन डिपो भी है जिसके जरिए मरीजों को मुफ्त में दवाइयां दी जाती हैं।
अस्पताल में पीने की पानी की समस्या होने से वॉटर कूलर मशीन भी जूनियर डॉक्टर्स ने लगवाया। अक्सर कई मरीजों या उनके तीमारदारों को आने-जाने के लिए किराया भी नहीं होता तो इसकी भी मदद करते हैं। प्राचार्य डॉ.एसपी सिंह कहते हैं, कई बार ऐसी स्थितियां बन जाती हैं कि जूनियर डॉक्टर ही मरीजों के लिए हर तरह से मददगार बन जाते हैं, जिनकी कोशिशों से मरीजों की जान बचती है।
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जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन में मेडिसिन, सर्जरी, आर्थो, ईएनटी, टीबी चेस्ट, गॉयनी समेत सभी विभागों के परास्नातक और सीनियर रेजिडेंट शामिल हैं।डॉ. विवेक, डॉ.अंकुर, डॉ.श्यामेंद्र, डॉ.अभिषेक झा, डॉ.अंकित, डॉ.जीतम, डॉ.विनोद, डॉ.अभिनव, डॉ.सोनू, डॉ.संतोष, डॉ.नीरज, डॉ.संदीप, डॉ. यशस्वी, डॉ.नेहा, डॉ.शिवांगी, डॉ.प्रीति, डॉ.शुभांगी आदि जरूरतमंद असहाय, लावारिस मरीजों की मदद को तत्पर रहते हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सिंह कहते हैं, चिकित्सालय में औसतन दो-तीन मरीजों की प्रतिदिन मदद की जाती है। इन्हें ब्लड, दवाइयां, खाने की व्यवस्था, जांच कराने में, सिटी स्कैन या फिर एमआरआई कराने में मदद करते है। इनका एक मेडिसिन डिपो भी है जिसके जरिए मरीजों को मुफ्त में दवाइयां दी जाती हैं।
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अस्पताल में पीने की पानी की समस्या होने से वॉटर कूलर मशीन भी जूनियर डॉक्टर्स ने लगवाया। अक्सर कई मरीजों या उनके तीमारदारों को आने-जाने के लिए किराया भी नहीं होता तो इसकी भी मदद करते हैं। प्राचार्य डॉ.एसपी सिंह कहते हैं, कई बार ऐसी स्थितियां बन जाती हैं कि जूनियर डॉक्टर ही मरीजों के लिए हर तरह से मददगार बन जाते हैं, जिनकी कोशिशों से मरीजों की जान बचती है।
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