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गो मांस निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की कोर्ट से मांग
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Tue, 21 Apr 2015 12:04 AM IST
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गाय व अन्य दुधारू पशुओं के मांस निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर हाईकोर्ट ने केंद्र तथा राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। दोनों सरकारों से चार सप्ताह में अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। लायर्स सिविलियन सोसाइटी की जनहित याचिका में उत्तर प्रदेश गोवध प्रतिषेध अधिनियम और पशु क्रूरता अधिनियम का कड़ाई से पालन कराने की मांग की गई है। याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति वीके मिश्र की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
याची का पक्ष रख रहे अधिवक्ता डॉ. डीके तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे राज्यों से बड़ी मात्रा में दुधारू जानवरों (गाय और भैंस) के मांस का निर्यात होता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत मांस का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। यहां से दुनिया के करीब 65 देशों को मांस का निर्यात किया जाता है। उत्तर प्रदेश में गो वध प्रतिषेध अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं हो रही है। संविधान के नीति निदेशक सिद्धांत में भी दूध देने वाले जानवरों के संरक्षण की जिम्मेदारी सरकारों को सौंपी गई है।
याची का यह भी कहना था कि पशुओं को काटने के बाद बचे हुए कचरे (स्लाटर वेस्ट) का सही तरीके से निस्तारण किया जाए। इसका निस्तारण बायो मेडिकल वेस्ट की तरह किया जाना चाहिए। वध किए जाने योग्य जानवरों का वध भी स्थायी निकायों द्वारा निर्मित वधशालाओं में ही किया जाना चाहिए। दुधारू जानवरों को काटने से किसान, पर्यावरण और कृषि को नुकसान पहुंच रहा है।
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याची का पक्ष रख रहे अधिवक्ता डॉ. डीके तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे राज्यों से बड़ी मात्रा में दुधारू जानवरों (गाय और भैंस) के मांस का निर्यात होता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत मांस का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। यहां से दुनिया के करीब 65 देशों को मांस का निर्यात किया जाता है। उत्तर प्रदेश में गो वध प्रतिषेध अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं हो रही है। संविधान के नीति निदेशक सिद्धांत में भी दूध देने वाले जानवरों के संरक्षण की जिम्मेदारी सरकारों को सौंपी गई है।
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याची का यह भी कहना था कि पशुओं को काटने के बाद बचे हुए कचरे (स्लाटर वेस्ट) का सही तरीके से निस्तारण किया जाए। इसका निस्तारण बायो मेडिकल वेस्ट की तरह किया जाना चाहिए। वध किए जाने योग्य जानवरों का वध भी स्थायी निकायों द्वारा निर्मित वधशालाओं में ही किया जाना चाहिए। दुधारू जानवरों को काटने से किसान, पर्यावरण और कृषि को नुकसान पहुंच रहा है।
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