प्रयागराज : बुर्का पहनकर भागने की फिराक में था गैंगस्टर मुजफ्फर, पुलिस ने किया गिरफ्तार
कौड़िहार से सपा ब्लॉक प्रमुख और गो तस्कर गिरोह सरगना मोहम्मद मुजफ्फर शनिवार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसे तब पकड़ा गया जब वह बमरौली में एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचा था। इसी दौरान पुलिस के आने की आहट पर उसने पुलिस की आंख में धूल झोंकने के लिए बुर्का पहन लिया।
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कौड़िहार से सपा ब्लॉक प्रमुख और गो तस्कर गिरोह सरगना मोहम्मद मुजफ्फर रविवार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उस पर पिछले साल सोरांव में दर्ज गोकशी के मुकदमे में यह कार्रवाई की गई। मुकदमे में विवेचना के दौरान नाम प्रकाश में आने पर उसे आरोपी बनाया गया था। पुलिस का दावा है कि तब से मुजफ्फर की तलाश चल रही थी। पुलिस से बचने के लिए उसने बुर्का पहन लिया था, लेकिन पुलिस ने उसे पहचान लिया।
शनिवार देर रात उसे सटीक सूचना पर पकड़ लिया गया। रविवार शाम को उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां रिमांड मंजूर होने पर उसे जेल भेज दिया गया। सूत्रों का कहना है कि जिस मुकदमे में मुजफ्फर की गिरफ्तारी हुई, वह 11 मई 2022 को सोरांव थाने के एसआई अखंड प्रताप सिंह ने लिखाया था।
उन्होंने सोरांव के कुरगांव में स्थित एचपी पेट्रोल पंप के पास हरियाणा का एक ट्रक पकड़ा जिस पर 16 गोवंश लदे थे। इनमें से आठ की मौत हो चुकी थी। मुकदमा अज्ञात में लिखा गया था और विवेचना के दौरान ही मुजफ्फर का नाम प्रकाश में आया। डीसीपी गंगानगर अभिषेक भारती ने बताया कि आरोपी को जेल भेज दिया गया है। मामले में एक आरोपी असलम पूर्व में ही जेल भेजा जा चुका है।
एक करोड़ की रंगदारी मांगने के मामले में हुआ था नामजद
28 मई को कौशाम्बी निवासी किसान रामजीवन (48) की तहरीर पर मुजफ्फर व उसके छह भाइयों पर एक करोड़ की रंगदारी मांगने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में आराेपी ब्लाॅक प्रमुख ने कोर्ट में गुहार लगाई थी। इस पर शपथ लेने तक उसके खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी गई थी। तीन जून को उसने कौड़िहार ब्लॉक में शपथ ली। हालांकि, इसके बाद रहस्यमयी तरीके से वह गायब हो गया। कुछ समय बाद सुप्रीम कोर्ट से उसे राहत मिल गई थी।
कौशाम्बी के सरायअकिल स्थित भगवानपुर निवासी रामजीवन (48) का आरोप है कि उनकी पत्नी आशा देवी के नाम पर अहमदपुर पावन स्थित 8320 वर्गमीटर जमीन पर 2008-09 में कब्जा कर मुजफ्फर व उसके भाई ईंट भट्ठा संचालित करने लगे थे। पिछले साल पूरामुफ्ती पुलिस व जिला प्रशासन ने जमीन को मुक्त कराते हुए उसे सौंप दिया था। तभी से मुजफ्फर के भाई व सहयोगी लगातार उसे व उसके परिवार को जान से मारने और जबरन जमीन कब्जाने की धमकी दे रहे थे। 13 मई को जमानत पर रिहा होने के बाद से मुजफ्फर उसे फिर धमकाने लगा।
जमीन देने के लिए दबाव बनाने लगा। 22 मई को वह बाइक से अपने साथी भीम पुत्र गुलाबचन्द्र निवासी भीखपुर मेंडवारा के साथ शहर जा रहा था। इसी दौरान मंदर मोड़ के आगे सफेद रंग के चारपहिया वाहन से पीछा करते हुए मुजफ्फर, अपने भाई अकरम, छोटे उर्फ अशरफ, जावेद अहमद, आजम व अन्य सहयोगियों संग आया और उसे रोक लिया। फिर मारापीटा और एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी।
30 से ज्यादा मुकदमे हैं दर्ज
सपा ब्लॉक प्रमुख मो. मुजफ्फर अंतर परिक्षेत्रीय गैंग का सरगना भी घोषित है। इसकी गैंग संख्या आईआर-05 है। इसमें उसके सहयोगियों समेत कुल 18 लोगों का नाम शामिल किया गया है। वह मूल रूप से नवाबगंज के चफरी का रहने वाला है। पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत उसकी कई संपत्तियां कुर्क की हैं। उसे 2021 में पूरामुफ्ती थाने में दर्ज गैंगस्टर के मामले में जेल भेजा गया था, जिसमें वह अप्रैल में जमानत पर छूटा था। इससे पहले भी वह जेल जा चुका है। पिछले साल नवंबर में तत्कालीन एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में उसकी 10 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई थी। इससे पहले भी अभियान चलाकर उसकी करोड़ों रुपये की संपत्तियां कुर्क करने की कार्रवाई हुई थी।
पुलिस से बचने को पहन लिया बुर्का