Prayagraj : गंगा स्थिर, यमुना का भी जलस्तर घटा. फिलहाल प्रशासन अलर्ट मोड पर
जिले में रविवार को बारिश थमने के साथ गंगा और यमुना के जलस्तर में मामूली बदलाव दर्ज किया गया। रात शाम आठ बजे जारी बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के अनुसार यमुना का जलस्तर नैनी में एक सेंटीमीटर घटकर 73.83 मीटर पर पहुंच गया, जबकि गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 77.95 मीटर पर स्थिर बना रहा। सोमवार को अच्छी बारिश के बाद फिर जलस्तर बढ़ सकता है।
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जिले में रविवार को बारिश थमने के साथ गंगा और यमुना के जलस्तर में मामूली बदलाव दर्ज किया गया। रात शाम आठ बजे जारी बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के अनुसार यमुना का जलस्तर नैनी में एक सेंटीमीटर घटकर 73.83 मीटर पर पहुंच गया, जबकि गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 77.95 मीटर पर स्थिर बना रहा। छतनाग में गंगा का जलस्तर दो सेंटीमीटर घटकर 73.59 मीटर दर्ज किया गया। सोमवार को फिर तेज बारिश के बाद जलस्तर बढ़ सकता है।
इससे पहले शाम चार बजे जारी रिपोर्ट में नैनी में यमुना का जलस्तर 73.84 मीटर, फाफामऊ में गंगा 77.95 मीटर और छतनाग में 73.61 मीटर दर्ज किया गया था। वहीं, सुबह आठ बजे की रिपोर्ट में रात की बारिश के कारण गंगा में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार जिले में खतरे का निशान 84.734 मीटर है। गंगा-यमुना दोनों अभी इससे काफी नीचे बह रही हैं।
दशाश्वमेध घाट पर मौजूद जल पुलिस के जय प्रकाश यादव ने यादव ने बताया कि यहां जैसे-जैसे यमुना नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे जल में लगाया गया बैरिकेड पीछे किया जा रहा है। साथ ही लोगों को बढ़ने जलस्तर की वजह से ज्यादा आगे जाकर स्नान नहीं करने की भी सलाह की जा रही है। नदियों के किनारे सुबह चार बजे से रात रात आठ बजे तक गोताखोर भी कड़ी नजर रख रहे हैं। वहीं, पुजारी रोहित मिश्रा ने बताया कि गंगा नदी के जलस्तर में पिछले कुछ दिनों में तीन मीटर से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। घाट की कई सीढ़िया जलमग्न हो गई हैं। वहीं, पूजा करने वाले हम लोग भी लगातार अपने बैठने की जगह में लगातार परिवर्तन कर रहे हैं।
नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच तैनात किए गए गोताखोर
गंगा और यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच जिले के विभिन्न घाटों पर तैनात गोताखोरों ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। दो शिफ्ट में सुबह चार से दोपहर 12 और दोपहर 12 बजे से रात आठ बजे तक गोताखोर को लगाया गया है। दशाश्वमेध घाट पर तैनात गोताखोर अमर कुमार बिंद, महेश कुमार निषाद और सनी निषाद ने बताया कि जल पुलिस से मिले दिशा-निर्देशों के तहत काम करते हैं।