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पटाखों की बिक्री में खेल, पटाखों के धुएं में उड़ी सरकार की गाइडलाइन, कान फोड़ रहे तेज आवाज

Sat, 14 Nov 2020 01:18 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 14 Nov 2020 01:18 AM IST
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Game in the sale of firecrackers, the government's guideline flew into the firecrackers' smoke, loud ears were broken
prayagraj news - फोटो : prayagraj

गाइडलाइन है कि वायु प्रदूषण केमामले में मॉडरेट श्रेणी में आने वाले शहरों में सिर्फ इको फ्रेंडली यानी ग्रीन पटाखे ही बजाए जाएं। लेकिन जिले में पटाखों की बिक्री में चल रहे खेल में यह गाइडलाइन धुआं हो गई है। हाल यह है कि कानफोडू आवाज केसाथ ही शहर की आबोहवा में जहर घोलने वाले पटाखे धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। अहम बात यह है कि जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं और पटाखा विक्रेता शहरियों की सेहत से खिलवाड़ कर रहेहैं।

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वायु प्रदूषण को देखते हुए शहर में इस बार इको फ्रेंडली पटाखे बजाए जाने की अनुमति है। पटाखा विक्रेताओं को भी इसी शर्त पर लाइसेंस जारी हुआ है कि वह ग्रीन पटाखे ही बेचें। लेकिन जब अमर उजाला ने शहर केपटाखा बाजारों का जायजा लिया तो पता चला कि यहां नियम-कानून ताक पर रखकर पटाखों की बिक्री की जा रही है। बृहस्पतिवार रात हमारी टीम एंग्लोबंगाली इंटर कॉलेज स्थित शहर केसबसे मुख्य पटाखा बाजार में पहुंची।

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Game in the sale of firecrackers, the government's guideline flew into the firecrackers' smoke, loud ears were broken
prayagraj news - फोटो : prayagraj

यहां टीम ने एक दुकान पर पहुंचकर ग्रीन पटाखे मांगे तो दुकानदार इसका मतलब ही नहीं समझ पाया। बढ़िया क्वालिटी का पटाखा मांगने पर उसने एक डिब्बा पकड़ाते हुए कहा कि इससे धमाकेदार आवाज होगी। यह पूछने पर कि तेज आवाज वाले पटाखों पर तो रोक है, उसका कहना था कि सब चलता है। इसी तरह एक दुकान पर पहुंचकर ग्रीन पटाखों केबारे में पूछा गया तो उसने अजीब ही जवाब दिया। उसका कहना था कि जिन पटाखों में ग्रीन रोशनी होती है, वह ही ग्रीन पटाखे हैं।

Game in the sale of firecrackers, the government's guideline flew into the firecrackers' smoke, loud ears were broken
prayagraj news - फोटो : prayagraj

बिना ‘ग्रीन क्रैकर’ केलोगो वाले पटाखों की भी बिक्री

एंग्लो बंगाली कॉलेज में लगे पटाखा बाजार स्थित दुकानों में कई ऐसे पटाखे भी बिकते मिले जिन पर ‘ग्रीन क्रैकर’ का लोगो नहीं लगा था। जानकारों का कहना है कि लोगोयुक्त पटाखे यह सुनिश्चित करते हैं कि उनसे वायु प्रदूषण आम पटाखों से कई गुना कम होता है। हालांकि जब दुकानदारों से पूछा गया तो उन्होंने दावा किया बिना लोगो वाले पटाखे भी इकोफ्रेंडली हैं।

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पटाखा कारोबारी। - फोटो : amar ujala

नियम धड़ाम, बाजार में 10 फीसदी पटाखे ही इकोफ्रेंडली

पटाखों की बिक्री में खेल चलने का खुलासा अग्निशमन विभाग की जांच में भी आया है। पता चला है कि शहर में लगे पटाखा बाजारों में 10 फीसदी पटाखे ही इकोफ्रेंडली है। बाकी के90 फीसदी पटाखे ऐसे हैं जो पटाखों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। विभाग की ओर से नियम तोड़कर पटाखे बेचने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की संस्तुति करते हुए जिला प्रशासन को रिपोर्ट भेजी गई है।

तीन दिन पहले प्रदेश सरकार की ओर से एनजीटी की रिपोर्ट के आधार पर 13 जनपदों में पटाखे जलाने पर रोक लगा दी गई थी। इन जिलों की एयर क्वालिटी इंडेक्स बेहद खराब थी। इसकेअलावा यह भी आदेशित किया गया कि मॉडरेट एक्यूआई वाले शहरों में भी केवल ग्रीन पटाखे ही बेचे और जलाए जाएं। उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए।

एक्यूआई के आधार पर प्रयागराज भी मॉडरेट श्रेणी में है ऐसे में यहां भी ग्रीन पटाखे ही बेचे जलाए जाने चाहिए। लेकिन शहर में लगे पटाखा बाजारों में नाम मात्र केपटाखे ही ग्रीन पटाखे हैं। अग्निशमन विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि केवल 10 फीसदी पटाखे ही ग्रीन हैं जबकि शेष बाजार हवा में जहर घोलने वाले पटाखों से पटा पड़ा है। सीएफओ आरएस मिश्रा ने बताया कि उनकी ओर से इस संबंध में एक रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी गई है। चूंकि लाइसेंस जारी कर्ता प्राधिकारी एडीएम सिटी हैं, ऐसे में उन्हें रिपोर्ट भेजी गई है। साथ ही तत्काल ऐसी दुकानों केलाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की गई है।

कार्रवाई की बजाय हीलाहवाली में जुटे अफसर

गंभीर मामला होने के बावजूद इस मामले में कार्रवाई की जगह अफसर हीलाहवाली में जुटे रहे। हाल यह रहा कि रिपोर्ट भेजने के24 घंटे बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब एडीएम सिटी अशोक कनौजिया से अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी ओर से एसीएम द्वितीय को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि पटाखों की अधिकांश बिक्री 13 व 14 नवंबर तक होे जाएगी। ऐसे में पटाखे बिकने के बाद जांच रिपोर्ट आई भी तो उसका फायदा क्या होगा। क्योंकि तब तक शहर की आबोहवा को प्रदूषित करने वाले पटाखे दगाए जा चुके होंगे। 
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