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इस्कॉन प्रयागराज में प्रभुपाद के नाम पर बनेगी गैलरी

Mon, 26 Aug 2019 01:06 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 26 Aug 2019 01:06 AM IST
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Gallery to be built in Prabhupada's name in ISKCON Prayagraj
Gallery to be built in Prabhupada's name in ISKCON Prayagraj - फोटो : ALDCOMPACT
इस्कॉन मंदिर में प्रभुपाद
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के नाम पर बनेगी गैलरी
0 संजोयी जाएंगी संस्थापक प्रभुपाद और प्रयागराज के रिश्ते से जुड़ीं स्मृतियां
प्रयागराज। अंतरराष्ट्रीय श्रीकृष्ण भावनामृत संघ ‘इस्कॉन’ के माध्यम से दुनिया भर में कृष्ण भक्ति का प्रचार-प्रसार करने वाले ए.सी.भक्तिवेदान्त स्वामी श्रील प्रभुपाद की स्मृतियां संजोयी जाएंगी। इसके तहत काशीराजनगर, बलुआघाट स्थित इस्कॉन मंदिर में प्रभुपाद के नाम पर एक गैलरी बनाई जाएगी। इसमें उनके प्रयागराज प्रवास के साथ ही उनसे जुड़े अनेक प्रसंगों, महत्वपूर्ण घटनाओं और स्थानों के विवरण शामिल किए जाएंगे ताकि देश और दुनिया भर से प्रयागराज आने वाले कृष्ण भक्त युगल प्रतिमा के दर्शन के साथ ही इस्कॉन के संस्थापक और प्रयागराज के रिश्ते से भी परिचित हो सकें।
अभयचरण डे के पिता गौरमोहन डे कपडे़ के कारोबारी थे। लेकिन, उन्होंने डे परिवार के पारिवारिक मित्र और जानेमाने सर्जन कार्तिक बोस की फर्म में मैनेजर की नौकरी कर ली।
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कारोबार के सिलसिले में ही अभयचरण परिवार सहित प्रयागराज आ गए। यहां वह साउथ मलाका में किराए के घर में संचालित रूप गौड़ीय मठ के करीब एक मकान में रहने लगे। यहां आने पर वह जानसेनगंज के स्वामी विवेकानंद मार्ग स्थित इलाहाबाद डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव बैंक वाली बिल्डिंग में दवा की एजेंसी चलाने लगे। प्रयागराज में ही उनके बड़े बेटे का जन्म हुआ, इसीलिए उन्होंने उसका नाम प्रयागराज रख दिया।
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प्रयागराज में वह वर्ष 1936 तक रहे और इसके बाद कोलकाता चले गए। हालांकि इस बीच वह रूपगौड़ीय मठ की पत्रिका के लिए नियमित रूप से लिखने के साथ ही कृष्ण भक्ति का प्रचार-प्रसार भी करते रहे। श्रील प्रभुपाद की जयंती पर ‘अमर उजाला’ से बातचीत में इस्कॉन के प्रवक्ता दीनदयाल कृष्णदास ने कहा, प्रभुपाद की दीक्षाभूमि होने के कारण इस्कॉन के लिए प्रयागराज बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसे में मंदिर और कृष्ण भक्ति के प्रचार-प्रचार के साथ संस्थापक प्रभुपाद जी और उनके प्रयागराज से जुड़ाव के बारे में कृष्ण भक्तों को जानकारी देना बहुत जरूरी है। इसीलिए इस्कॉन में उनसे जुड़ी स्मृतियों को संजोने की पहल का संकल्प लिया गया है।

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प्रयागराज में ही मिली दीक्षा, नाम भी
इस्कॉन संस्थापक श्रील प्रभुपाद का प्रयागराज से न सिर्फ गहरा रिश्ता रहा बल्कि यह उनकी दीक्षा-भूमि भी रही है। रूप गौड़ीय मठ के सन्त श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ने वर्ष 1932 में प्रभुपाद को दीक्षा देकर चैतन्य श्रीकृष्ण के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित किया था। दीक्षा के बाद ही अभय चरण डे, अभयचरणारविंद दास ‘एसी’ और भक्ति वेदांत की डिग्री के बाद एसी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद हो गए। हालांकि अभयचरण अपने गुरु भक्तिसिद्धान्त सरस्वती से वर्ष1922 में ही जन्मभूमि कोलकाता में मिल चुके थे।
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