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जी-20 : भारत मंडपम की परिकल्पना से दुनिया में छाई प्रयागराज के तारिक की वास्तुकला, अद्भुत डिजाइन से किया कायल

Mon, 11 Sep 2023 09:00 AM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज
अनूप ओझा, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 11 Sep 2023 09:00 AM IST
सार

मंडपम के जरिए पूरी दुनिया के बीच भारतीय वास्तुकला का लोहा मनवाने वाला कोई और नहीं, बल्कि संगमनगरी का ही लाल है। दीवारों, खंभों से लेकर कन्वेशन हॉल और प्रदर्शनी प्वाइंट तक की परिकल्पना कुलभास्कर इंटर कॉलेज से 12वीं तक की पढ़ाई करने वाले चकिया के तारिक मुजीब सिद्दीकी ने की है।

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G-20: Architecture of Tariq of Prayagraj captured the world with the concept of Bharat Mandapam
जी 20 के भारत मंडपम की डिजाइन करने वाले प्रयागराज के तारिक मुजीब सिद्दीकी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली के प्रगति मैदान में बने जिस भारत मंडपम के अनूठे वास्तु और अद्भुत शिल्प संरचना को डिजाइन करने वाले के बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे। मंडपम के जरिए पूरी दुनिया के बीच भारतीय वास्तुकला का लोहा मनवाने वाला कोई और नहीं, बल्कि संगमनगरी का ही लाल है। दीवारों, खंभों से लेकर कन्वेशन हॉल और प्रदर्शनी प्वाइंट तक की परिकल्पना कुलभास्कर इंटर कॉलेज से 12वीं तक की पढ़ाई करने वाले चकिया के तारिक मुजीब सिद्दीकी ने की है।

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भारत मंडप की डिजाइन के पीछे की सोच और सपने को धरातल पर उतारने में तारिक मुजीब को आठ साल लगे हैं। आर्कोप एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड के एसोसिएट डायरेक्टर तारिक प्रगति मैदान में 82 एकड़ क्षेत्रफल में भारत मंडपम को डिजाइन करने के अवसर को अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं। रविवार को उन्होंने फोन पर इस 2700 करोड़ रुपये की भरत मंडपम परियोजना से जुड़ने और इसके बाह्य और आंतरिक हिस्सों को भारतीय कलाओं, मूल्यों के अनुरूप डिजाइन करने के सफर को साझा किया।

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भारत मंडपम। - फोटो : अमर उजाला

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के जरिए हुआ था चयन

वह बताते हैं कि पहली बार भारत मंडपम परियोजना के लिए नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी ऑफ इंडिया( एनबीसीसी) की ओर से वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित की गई। यह प्रतियोगिता प्रगति मैदान के पुनवर्विकास के लिए कराई गई। इसमे कहा गया था कि प्रगति मैदान में एक ऐसा एग्जीविशन सेंटर और कन्वेंशन हॉल बनाना है, जहां भविष्य में भारत सरकार जी-20 शिखर सम्मेलन कराना चाहती है।

इस घोषणा के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस प्रतियोगिता में विश्व की मशहूर आठ कंपनियों ने हिस्सा लिया। इसमें प्रतिभाग करने वाली कंपनियों के साथ शर्त थी कि एक भारतीय कंपनी भी उनके साथ रहेगी। इसके एदास सिंगापुर केे साथ तारिक की कंपनी मेसर्स आर्कोप एसोसिएट्स ने इसमें हिस्सा लिया। तारिक बताते हैं कि काम बहुत चुनौती पूर्ण था।

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भारत मंडपम का ऑडिटोरियम। - फोटो : अमर उजाला

कई देशों में स्थायी तौर पर बने वैन्यू का किया अवलोकन

सबसे बड़ी समस्या थी कि भारत में पहली बार इस आयोजन के लिए डिजाइन तैयार करनी थी। इसलिए पूर्व में जहां जी-20 शिखर सम्मेलन हुए थे, वहां का दौरा उन्होंने अपनी टीम के साथ किया। इसमें चीन, कुवैत में स्थाई तौर पर बने वैन्यू को भी देखा गया। इसके अलावा जर्मनी, इटली, मलयेशिया के कन्वेंशन सेंटर के साथ मेलबर्न और सिडनी के ओपेरा हाउस की भी डिजाइन देखी गई।

सिडनी के ओपेरा हाउस की क्षमता पांच हजार सीटों की थी। ऐसे में भारत मंडपम के लिए सात हजार सीटों वाले कन्वेंशन हॉल को डिजाइन किया गया। प्रजेंटेशन के बाद आर्कोप की डिजाइन स्वीकार कर ली गई।

इसके बाद तारिक अपने सहयोगी संजय सिंह समेत 15 सदस्यी वास्तुकारों की टीम के साथ भारत मंडपम को तैयार करने में जुट गए। इस इमारत को G-20 के आयोजन को ध्यान में रखते हुए भारतीय संस्कृति और विरासत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन किया गया। वह बताते हैं कि अतिथियों के आगमन वाले बरामदे से शुरू होकर जी-20 हॉल की ओर चलने तक के पूरे क्षेत्र को भारतीय कला की विविधता से रचा गया।

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भारत मंडपम। - फोटो : अमर उजाला

भारत मंडपम की दीवारों पर तारिक ने उकेरा भारतीय कलाओं का फ्यूजन

 

इसमें दीवारों पर शास्त्रीय और लोक कलाओं का फ्यूजन तैयार किया गया। एक दीवार भारतीय योग, प्राणायाम पर आधारित डिजाइन की गई तो दूसरी सूर्य शक्ति के रूप में सात अश्व रथ के रूप में तैयार की गई। इसी तरह एक तरफ जीरो टू इसरो की परिकल्पना संजोई गई तो दूसरी ओर मधुबनी, मिथिला पेंटिंग, कलमारी, उड़ीसा पटचित्र, गोंड़ कला, कालीघाट चित्रकला समेत विविध कलाओं को उकेरा गया। इसे विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, व्यापार मेलों, सम्मेलनों और प्रतिष्ठित समारोहों की मेजबानी के लिए भव्यता प्रदान की गई।

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