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वायदा भूल बैठा नगर निगम फिर महादेवी के नाम गृहकर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 11 Sep 2018 01:45 AM IST
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Mahadevi Verma
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वैश्विक रचना संसार में हिन्दी को पैठ और प्रतिष्ठा दिलाने वाली कवयित्री महादेवी वर्मा अपने ही शहर में उपेक्षित हैं। जयंती और पुण्यतिथि पर संस्थाओं, संस्थानों की ओर से सभा, गोष्ठियों के माध्यम से जिस तरह रस्मी तौर पर महादेवी रेखांकित की जाती हैं, उसी तरह मिनी सदन कहे जाने वाले नगर निगम सदन ने भी उन्हें एक दिन की चर्चा के बाद हाशिये पर कर दिया है।
पुण्यतिथि पर निगम ने अपनी तरह से उन्हें याद करते हुए उनके नाम वित्तीय सत्र 2018-19 का 55,053 रुपये का गृहकर भेजा है। राजस्व निरीक्षक जोन तीन की ओर से भेजे गए बिल में महादेवी के नाम और उन पर उक्त राशि के बकाए से सिर्फ महादेवी आवास ही नहीं साहित्यप्रेमी भी हतप्रभ और हैरान है। सिर्फ इसलिए नहीं कि यह बिल दशकों पहले दुनिया छोड़ चुकीं महादेवी के नाम है, बल्कि इसलिए भी इसी केसाथ महापौर और सदन की ओर से किए गए वायदे भी उजागर हो गए हैं।
बता दें, पिछली फरवरी में निगम के कर विभाग की ओर से महादेवी के नाम तकरीबन 48 हजार रुपये के बकाए के साथ चेतावनी दी गई थी कि नोटिस हासिल होने के पंद्रह दिनों के भीतर टैक्स न जमा करने अथवा संतोषजनक जवाब न देने पर कुर्की करने की चेतावनी दी थी। ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने के बाद सदन की सहमति से महापौर ने महादेवी आवास का गृ़हकर माफ करने की घोषणा की थी। साहित्य सहकार न्यास के सदस्य आशीष पांडेय का कहना है कि निगम की ओर से न्यास से जुड़े विवरण मांगे थे जिसे तकरीबन छह माह पहले ही उपलब्ध करा दिया गया था। इसके बावजूद महादेवी के नाम से उक्त बिल का आना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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पुण्यतिथि पर निगम ने अपनी तरह से उन्हें याद करते हुए उनके नाम वित्तीय सत्र 2018-19 का 55,053 रुपये का गृहकर भेजा है। राजस्व निरीक्षक जोन तीन की ओर से भेजे गए बिल में महादेवी के नाम और उन पर उक्त राशि के बकाए से सिर्फ महादेवी आवास ही नहीं साहित्यप्रेमी भी हतप्रभ और हैरान है। सिर्फ इसलिए नहीं कि यह बिल दशकों पहले दुनिया छोड़ चुकीं महादेवी के नाम है, बल्कि इसलिए भी इसी केसाथ महापौर और सदन की ओर से किए गए वायदे भी उजागर हो गए हैं।
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बता दें, पिछली फरवरी में निगम के कर विभाग की ओर से महादेवी के नाम तकरीबन 48 हजार रुपये के बकाए के साथ चेतावनी दी गई थी कि नोटिस हासिल होने के पंद्रह दिनों के भीतर टैक्स न जमा करने अथवा संतोषजनक जवाब न देने पर कुर्की करने की चेतावनी दी थी। ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने के बाद सदन की सहमति से महापौर ने महादेवी आवास का गृ़हकर माफ करने की घोषणा की थी। साहित्य सहकार न्यास के सदस्य आशीष पांडेय का कहना है कि निगम की ओर से न्यास से जुड़े विवरण मांगे थे जिसे तकरीबन छह माह पहले ही उपलब्ध करा दिया गया था। इसके बावजूद महादेवी के नाम से उक्त बिल का आना दुर्भाग्यपूर्ण है।
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