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यूपी : सपा विधायक विजमा यादव को हर्जाना अदा करेंगे पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Thu, 05 Oct 2023 01:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 05 Oct 2023 01:07 PM IST
सार

फरवरी 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी विजमा यादव ने भाजपा अपना दल गठबंधन के प्रत्याशी पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी को पराजित कर दिया था। प्रतापपुर विधानसभा से निर्वाचित घोषित हुईं विजमा यादव के निर्वाचन को पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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Former minister Rakesh Dhar Tripathi will pay compensation to SP MLA Vijma Yadav, High Court orders
पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रतापपुर विधानसभा से विधायक विजमा यादव के खिलाफ पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी की ओर से दाखिल चुनाव याचिका में संशोधन की सशर्त अनुमति दे दी है। शर्त के मुताबिक पूर्व मंत्री विधायक विजमा यादव को दस हजार रुपये हर्जाना अदा करेंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की अदालत ने पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी की ओर से चुनाव याचिका में दाखिल संशोधन प्रार्थना पत्र की सुनवाई करते हुए दिया।

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गौरतलब है की फरवरी 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी विजमा यादव ने भाजपा अपना दल गठबंधन के प्रत्याशी पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी को पराजित कर दिया था। प्रतापपुर विधानसभा से निर्वाचित घोषित हुईं विजमा यादव के निर्वाचन को पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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पूर्व मंत्री ने चुनाव याचिका में आरोप लगाया है कि निर्वाचित विधायक विजमा यादव ने अपने नामांकन फॉर्म में आपराधिक मामलों में अदालतों में निर्मित हो चुके आरोपों की जानकारी छुपाई थी, इसलिए उनके निर्वाचन को रद्द किया जाना चाहिए। चुनाव याचिका दाखिल होने के दौरान अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज पेश न करने के कारण उन्होंने संशोधन प्रार्थना पत्र के माध्यम से दस्तावेजों को चुनाव याचिका में शामिल करने की मांग की थी।

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बार-बार अर्जी पेश करने पर विधायक के वकील ने उठाई आपत्ति

विधायक विजमा यादव के अधिवक्ता ने संशोधन प्रार्थना पत्र पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह प्रार्थना पत्र कालबाधित हो चुका है। हालांकि, यह उनका दूसरा प्रार्थना पत्र है, जो पोषणीय नहीं है। बार-बार एक ही तरह के प्रार्थना पत्र सिर्फ निर्वाचित विधायक को परेशान करने और याचिका को लंबे समय तक लंबित रखने के उद्देश्य से दाखिल किए जा रहे हैं।

कोर्ट ने कहा कि याची की ओर से पेश संशोधन की अर्जी चुनाव याचिका में पहले से ही लगाए गए उनके आरोपों के समर्थन में पेश दस्तावेज हैं, इसलिए इसे कालबाधित अर्जी नहीं माना जा सकता। हालांकि, बार-बार पेश की जा रही इस तरह की अर्जी से विपक्षी विधायक को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ रही है।

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद याची पूर्व मंत्री के संशोधन प्रार्थना पत्र को दस हजार रुपये के हर्जाने के साथ स्वीकार कर लिया। यह हर्जाना पूर्व मंत्री को विधायक विजमा यादव को एक हफ्ते के भीतर अदा करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को होगी।

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