फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Former Chief Justice of Supreme Court KN Singh passes away

प्रयागराज : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केएन सिंह का निधन

Thu, 08 Sep 2022 11:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 08 Sep 2022 11:55 PM IST
सार

दोपहर एक बजे मिंटो रोड स्थित उनके आवास से शव यात्रा निकलेगी। एक वर्ष पहले तक वह दिल्ली में ही रह रहे थे। एक वर्ष पहले पत्नी के निधन के बाद वह इलाहाबाद में ही रह रहे थे।

विज्ञापन
Former Chief Justice of Supreme Court KN Singh passes away
Prayagraj News : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केएन सिंह। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति कमल नारायण (के एन) सिंह का प्रयागराज में आठ सितंबर की सुबह साढ़े नौ बजे निधन हो गया। वह तकरीबन 96 वर्ष के थे। उनकी तबीयत दो दिनों से खराब थी और वह अस्पताल में भर्ती थे। पौत्र देवांश सिंह ने बताया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश का अंतिम संस्कार शंकर घाट, तेलियरगंज स्थित विद्युत शवदाह गृह में नौ सितंबर को किया जाएगा।

विज्ञापन



दोपहर एक बजे मिंटो रोड स्थित उनके आवास से शव यात्रा निकलेगी। एक वर्ष पहले तक वह दिल्ली में ही रह रहे थे। एक वर्ष पहले पत्नी के निधन के बाद वह इलाहाबाद में ही रह रहे थे। वह अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके छोटे भाई न्यायमूर्ति एपी सिंह और पुत्र न्यायमूर्ति डीपी सिंह इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति पद से अवकाश ग्रहण कर चुके हैं।

विज्ञापन

43 वर्ष की उम्र में बन गए थे हाईकोर्ट के जज
न्यायमूर्ति कमल नारायण सिंह का जन्म 13 दिसंबर 1926 को मेजा के चकडीहा गांव के एक जमींदार परिवार में हुआ था। वह औपचारिक रूप से पश्चिमी शिक्षा प्राप्त करने वाले मांडा वंश में पहले व्यक्ति थे। एलआरएलए स्कूल, सिरसा से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद में इविंग क्रिश्चियन कॉलेज में प्रवेश लिया।


1949 में विधि की पढ़ाई पूरी कर वकालत के पेशे में आ गए। 1963 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के लिए कनिष्ठ स्थायी अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया था। वर्ष1967 में वह सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल बने। 1970 में उन्हें उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया लेकिन तीन महीने बाद ही 25 अगस्त 1970 को वह 43 वर्ष की आयु में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीठ पर 15 से अधिक वर्षों तक बैठने के बाद उन्हें 10 मार्च 1986 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया। 25 नवंबर 1991 को उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद ग्रहण किया। वह 13 दिसंबर को सेवानिवृत्त हुए। 


बाद में 1991 में उन्होंने 13वें विधि आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और 1994 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने वाराणसी, उत्तर प्रदेश की उदय प्रताप कॉलेज एजुकेशनल सोसाइटी की प्रबंध समिति के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री, राम मनोहर लोहिया, राज नारायण और चौधरी चरण सिंह जैसे दिग्गजों के कानूनी मामलों का प्रतिनिधित्व भी किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed