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शहर पश्चिमी में पहली बार खिला कमल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 12 Mar 2017 02:14 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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शहर पश्चिमी विधानसभा के मतदाताओं ने इस बार इतिहास रच दिया। जातीय समीकरणों और मतों के ध्रुवीकरण को दरकिनार करते हुए मतदाताओं ने कमल पर विश्वास जताया। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कभी अपने ताऊ चौधरी नौनिहाल सिंह की सीट रही शहर पश्चिमी पर जीत दर्ज करते हुए सभी आशंकाओं पर पूर्ण विराम लगा दिया। सिद्धार्थ नाथ ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव में उतरी इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष ऋचा सिंह को 25336 मतों के अंतर से हरा दिया। शहर पश्चिमी से लगातार दो बार विधायक चुनी जाती रहीं पूजा पाल को तीसरे पर संतोष करना पड़ा है।
पश्चिमी विधान सभा को भाजपा के लिए बड़ी चुनौती माना गया था। इस सीट को पूर्व सांसद अतीक अहमद के वर्चस्व वाली सीट माना जाता है, हालांकि मतों के ध्रुवीकरण ने बसपा की पूजा पाल को दो बार विधानसभा पहुंचाया। इस बार भी पूजा पाल अपने मजबूत दावे के साथ उतरी थीं मगर सपा की ऋचा सिंह और भाजपा से सिद्धार्थ नाथ के मैदान में आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। पश्चिमी सीट वैसे मुस्लिम, पिछली जाति और दलित मतदाता बहुल मानी जाती है, मगर यहां अगड़ी जाति के कायस्थ और क्षत्रिय मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। क्षेत्र के शहरी इलाके के विस्तार से ब्राह्मण मतदाता भी बढ़े हैं। पश्चिमी में अधिवक्ताओं की भी अच्छी संख्या है, जिनका भाजपा को समर्थन प्राप्त है।
निवर्तमान विधायक पूजा पाल को दलित, पिछड़े के साथ-साथ अगड़ी जातियों का मत भी मिलता था। इसके अलावा पश्चिमी में पिछले दो चुनावों में सबसे बड़ा फैक्टर ध्रुवीकरण रहा है। मगर इस बार मोदी की लहर में पुराने सारे समीकरण उलट गए। मतों के ध्रुवीकरण का लाभ पूजा पाल को नहीं मिला। सवर्ण और पिछड़ी जातियों ने भी भाजपा को बेहतर विकल्प के रूप में स्वीकार किया।
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री की दूसरी बेटी के बेटे हैं। उनके पिता पूर्व मंत्री चौधरी नौनिहाल सिंह के छोटे भाई थे। सेंट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से स्नातक सिद्धार्थ 1997 से भाजपा में सक्रिय हैं। उनकी पत्नी डा. नीता सिंह दंत चिकित्सक हैं। सिद्धार्थनाथ के दो बेटे सिद्धांत और निशांत हैं। शहर पश्चिमी से उनका यह पहला चुनाव था। इससे पूर्व चौधरीनौनिहाल भी शहर पश्चिमी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
चुनाव जीतने के बाद अमर उजाला से बातचीत में सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने जो काम मुझे सौंपा था उसे पूरा किया। उन्होंने कहा था कि शहर पश्चिमी से भय और आतंक का माहौल खत्म करना है। अब यहां सिर्फ विकास की राजनीति होगी। इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है।
किसको मिले कितने वोट
सिद्धार्थनाथ सिंह- भाजपा -- 85518
ऋचा सिंह - सपा -- 60182
पूजा पाल बसपा -- 40499
हसन अखलाख निर्दलीय-- 4018
चंद्रदेव सिंह आमदल-- 2974
इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल के सुनील कुमार को 999 मत, प्रगतिशील समाज पार्टी के दक्खिनी प्रसाद को 203, आवासी विकास पार्टी के नदीम अहमद को 208, विकास पार्टी के राजकुमार श्रीवास्तव को 307, निर्दलीय गनेश जी को 368, निर्दलीय निजामुद्दीन को 250, निर्दलीय राजेंद्र कुमार को 435, निर्दलीय रीता देवी को 1000 मत मिले। इसमें से किसी को भी पसंद न करने वाले 1659 मत पड़े।
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पश्चिमी विधान सभा को भाजपा के लिए बड़ी चुनौती माना गया था। इस सीट को पूर्व सांसद अतीक अहमद के वर्चस्व वाली सीट माना जाता है, हालांकि मतों के ध्रुवीकरण ने बसपा की पूजा पाल को दो बार विधानसभा पहुंचाया। इस बार भी पूजा पाल अपने मजबूत दावे के साथ उतरी थीं मगर सपा की ऋचा सिंह और भाजपा से सिद्धार्थ नाथ के मैदान में आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। पश्चिमी सीट वैसे मुस्लिम, पिछली जाति और दलित मतदाता बहुल मानी जाती है, मगर यहां अगड़ी जाति के कायस्थ और क्षत्रिय मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं। क्षेत्र के शहरी इलाके के विस्तार से ब्राह्मण मतदाता भी बढ़े हैं। पश्चिमी में अधिवक्ताओं की भी अच्छी संख्या है, जिनका भाजपा को समर्थन प्राप्त है।
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निवर्तमान विधायक पूजा पाल को दलित, पिछड़े के साथ-साथ अगड़ी जातियों का मत भी मिलता था। इसके अलावा पश्चिमी में पिछले दो चुनावों में सबसे बड़ा फैक्टर ध्रुवीकरण रहा है। मगर इस बार मोदी की लहर में पुराने सारे समीकरण उलट गए। मतों के ध्रुवीकरण का लाभ पूजा पाल को नहीं मिला। सवर्ण और पिछड़ी जातियों ने भी भाजपा को बेहतर विकल्प के रूप में स्वीकार किया।
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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री की दूसरी बेटी के बेटे हैं। उनके पिता पूर्व मंत्री चौधरी नौनिहाल सिंह के छोटे भाई थे। सेंट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से स्नातक सिद्धार्थ 1997 से भाजपा में सक्रिय हैं। उनकी पत्नी डा. नीता सिंह दंत चिकित्सक हैं। सिद्धार्थनाथ के दो बेटे सिद्धांत और निशांत हैं। शहर पश्चिमी से उनका यह पहला चुनाव था। इससे पूर्व चौधरीनौनिहाल भी शहर पश्चिमी का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
चुनाव जीतने के बाद अमर उजाला से बातचीत में सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने जो काम मुझे सौंपा था उसे पूरा किया। उन्होंने कहा था कि शहर पश्चिमी से भय और आतंक का माहौल खत्म करना है। अब यहां सिर्फ विकास की राजनीति होगी। इस जीत का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है।
किसको मिले कितने वोट
सिद्धार्थनाथ सिंह- भाजपा -- 85518
ऋचा सिंह - सपा -- 60182
पूजा पाल बसपा -- 40499
हसन अखलाख निर्दलीय-- 4018
चंद्रदेव सिंह आमदल-- 2974
इसके अलावा राष्ट्रीय लोकदल के सुनील कुमार को 999 मत, प्रगतिशील समाज पार्टी के दक्खिनी प्रसाद को 203, आवासी विकास पार्टी के नदीम अहमद को 208, विकास पार्टी के राजकुमार श्रीवास्तव को 307, निर्दलीय गनेश जी को 368, निर्दलीय निजामुद्दीन को 250, निर्दलीय राजेंद्र कुमार को 435, निर्दलीय रीता देवी को 1000 मत मिले। इसमें से किसी को भी पसंद न करने वाले 1659 मत पड़े।