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Prayagraj : 35 साल से फूलपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा सके, 1985 में आखिरी बार मिली थी जीत

Wed, 14 Aug 2024 04:16 PM IST
विनोद सिंह अविनाशी श्रीवास्तव, अमर उजाला प्रयागराज
अविनाशी श्रीवास्तव, अमर उजाला प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 14 Aug 2024 04:16 PM IST
सार

नेहरू-गांधी परिवार की पारंपरिक सीट बताकर कांग्रेस नेता इस सीट पर पार्टी के मजबूत होने की दुहाई दे रहे हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि कांग्रेस यहां आखिरी बार 1985 में जीती थी। फिर, एक बार छोड़ दें तो 35 साल से प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा सके।

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For 35 years, Congress candidates could not even save the deposit on Phulpur seat, last time they won in 1985.
फुलपुर विधानसभा उप चुनाव। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

भाजपा सांसद प्रवीण पटेल के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई है फूलपुर विधानसभा सीटप्रयागराज। इंडिया गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस ने फूलपुर विधानसभा सीट पर दावा बेशक ठोका है, लेकिन उसकी दलीलें बहुत दमदार नहीं दिख रहीं। नेहरू-गांधी परिवार की पारंपरिक सीट बताकर कांग्रेस नेता इस सीट पर पार्टी के मजबूत होने की दुहाई दे रहे हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि कांग्रेस यहां आखिरी बार 1985 में जीती थी। फिर, एक बार छोड़ दें तो 35 साल से प्रत्याशी जमानत तक नहीं बचा सके।

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भाजपा विधायक प्रवीण पटेल के फूलपुर सांसद चुने जाने से यह सीट रिक्त हुई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्वी जोन के प्रभारी राजेश तिवारी ने सोमवार को यहां अपना दावा दोहराया। कहा, यूपी की जिन 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहा है, उनमें पांच सीटें सपा के कब्जे वाली हैं। वहां सपा ही लड़े। बाकी पांच सीटें कांग्रेस को दी जाएं। जिन सीटों पर कांग्रेस दावा ठोक रही है, उनमें फूलपुर भी है।

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पार्टी ने इलाहाबाद सांसद उज्ज्वल रमण सिंह को यहां का पर्यवेक्षक बनाया है। उज्ज्वल रमण सपा से लोकसभा चुनाव के ऐन पहले ही कांग्रेस में आए थे। चुनावी इतिहास बताता है कि फूलपुर सीट (2012 के चुनाव से पहले नाम झूंसी था) पर कांग्रेस बीते चार दशक में कोई करिश्मा नहीं दिखा सकी है। यहां से 1985 में महेंद्र प्रताप सिंह जीते थे। इसके बाद महेंद्र भी जनता दल में चले गए और जीते भी।

1989 के इस चुनाव में कांग्रेस इस चुनाव में उपविजेता रही थी। यही आखिरी चुनाव था, जब कांग्रेस प्रत्याशी ने दूसरा स्थान पाकर जमानत बचा ली। इसके बाद सभी चुनावों में कांग्रेस का बुरा हाल रहा। 2022 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धनाथ मौर्य को सिर्फ 1626 वोट ही हासिल हुए। वह चौथे स्थान पर रहे। कांटे के इस मुकाबले में सपा के मुज्तबा सिद्दीकी 2732 मतों से भाजपा के प्रवीण पटेल के हाथों हार गए थे।

1993 में खुला था सपा का खाता, चार बार हासिल की जीत

फूलपुर में कांग्रेस के मुकाबले सपा का प्रदर्शन दमदार रहा है। 1993 में जवाहर पंडित ने सपा का खाता खोला था। उनकी हत्या के बाद 1996 में उनकी पत्नी विजमा यादव लगातार दो बार जीतीं। 2007 में प्रवीण पटेल ने बसपा के टिकट पर जीत हासिल की। लेकिन, 2012 में फिर सपा के सईद अहमद ने बाजी मार ली। इसके बाद कुर्मी बाहुल्य इस सीट पर सपा जीत का स्वाद चखने के लिए बेचैन है। मजबूत स्थिति देख पार्टी के कई नेता टिकट के लिए हाईकमान तक सिफारिशें भी लगा रहे हैं।

फूलपुर सीट पर सपा और कांग्रेस की स्थिति

वर्ष                        सपा                                     कांग्रेस

2022             1,00,825 - उपविजेता             1626

2017             67299 - उपविजेता             सपा को समर्थन

2012             72898 - विजेता             6424

2007             42,853 - उपविजेता             8189

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