फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Firecracker factory explosion Save my children mother kept searching for sound of her children

पटाखा फैक्टरी विस्फोट: मेरे बच्चों को बचा लो, बच्चों की आवाज तलाशती रही मां, थम चुकी थीं तीन बच्चों की सांसें

Tue, 01 Sep 2026 03:39 PM IST
Akash Dubey अमित गुप्ता, प्रयागराज
अमित गुप्ता, प्रयागराज Published by: Akash Dubey Updated Tue, 01 Sep 2026 03:39 PM IST
सार

दोपहर में अनीता अपने चार बच्चों को पढ़ा रही थी। पड़ोस के पटाखा गोदाम में हुए धमाके से घर मलबे में बदल गया। जाह्नवी, आदित्य और रवि की मौत हो गई, अनीता घायल है।

विज्ञापन
Firecracker factory explosion Save my children mother kept searching for sound of her children
कौशाम्बी में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दोपहर का वक्त था। घर में सब कुछ सामान्य था। अनीता (35) अपने चारों बच्चों बेटी जाह्नवी (12), बेटे आदित्य (12), अमित (13) और रवि (8) को बैठाकर पढ़ा रही थी। पति घर पर नहीं थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ सेकंड में यह घर चीख पुकार व मलबे में बदल जाएगा। फिर एक ऐसा धमाका हुआ कि अनीता के कान सुन्न हो गए।

विज्ञापन

तेज आवाज के साथ घर की दीवार फटी और उसका हिस्सा अनीता के सिर पर आ गिरा। धूल का गुबार उठा। कुछ पल के लिए उसे कुछ दिखाई दिया न सुनाई दिया। वह बेहोश हो गई। कुछ देर बाद अनीता को होश आया। आंखें खुलीं तो सामने वह घर नहीं था जिसमें कुछ देर पहले बच्चों की पढ़ाई चल रही थी। चारों तरफ मलबा था।

विज्ञापन
विज्ञापन

चीख-पुकार थी। वह एक-एक कर उनके नाम पुकारने लगी जाह्नवी... आदित्य... अमित... रवि... उसे लगा बच्चे कहीं मलबे के नीचे फंसे हैं। वह उनकी आवाज सुनने की कोशिश करती रही। उसे बच्चों की आवाजें सुनाई देती रहीं। घायल होने के बावजूद वह बचाव में जुटे लोगों से कहती कि मेरे बच्चों को बचा लो, चारों बच्चे अंदर दबे हैं।

विज्ञापन

आंखों के सामने सब कुछ तहस-नहस
जिन बच्चों के नाम लेकर वह उन्हें बचाने की गुहार लगा रही थी उनमें से जाह्नवी, आदित्य और रवि की मौत हो चुकी थी। अनीता को इसकी जानकारी नहीं थी। अनीता ने बताया कि जिस घर में पटाखों का गोदाम चल रहा था, उससे उसका मकान तीसरे नंबर पर था। धमाका इतना जबरदस्त था कि उसकी चपेट में आसपास के मकान भी आ गए। 

आंखों के सामने सब कुछ तहस-नहस हो गया। वहीं, अस्पताल में अनीता ने रोते हुए बताया कि अगर उसे पहले से पता होता कि पड़ोस में पटाखे बनाए जा रहे हैं तो वह अपने बच्चों को लेकर कहीं दूर चली जाती। कौन पटाखा बनाता था, इसकी उसे जानकारी नहीं है।

अपनी चोट की नहीं, बच्चों की चिंता
घायल अनीता अस्पताल पहुंच गई। उसके सिर पर पट्टी बंधी थी लेकिन उसे अपनी चोट को लेकर चिंता नहीं थी। उसकी आंखें अपने बच्चों को तलाश रही थीं। वह बार-बार यही पूछती रही कि उसके बच्चे कहां हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed