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Prayagraj News: धोखाधड़ी व कूटरचना में ब्वॉयज हाईस्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य पर एफआईआर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 May 2025 02:21 AM IST
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FIR against the acting principal of Boys High School for fraud and forgery
शहर के प्रतिष्ठित ब्वॉयज हाईस्कूल में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के सहारे नौकरी प्राप्त करने का मामला सामने आया है। विद्यालय के कार्यवाहक प्रधानाचार्य डेविड ल्यूक पर जालसाजी, धोखाधड़ी और कूटरचना के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनके खिलाफ बिशप मॉरिस एडगर दान ने सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। आरोप है कि उन्होंने जाली शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाई।
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पुलिस को दी गई शिकायत में उन्होंने बताया कि वह बिशप डायसिस ऑफ लखनऊ चर्च आफ नॉर्थ इंडिया के पद पर हैं। वर्ष 2010 में डेविड ल्यूक को ब्वॉयज हाई स्कूल का कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त किया था। उसके बाद वर्ष 2012 में ब्वॉयज हाई स्कूल के प्रधानाचार्य के पद का विज्ञापन निकला, जिसमें डेविड ल्यूक समेत कई अभ्यर्थियों ने भाग लिया। सभी अभ्यर्थियों ने अपने प्रमाण पत्रों को सेल्फ अटेस्ट करके जमा किया। इनकी मूल प्रति शिकायतकर्ता के पास मौजूद है। इसमें डेविड के असली हस्ताक्षर हैं। सेल्फ अटेस्टेड भी उन्हीं के द्वारा लिखा गया है। 2012 में ब्वॉयज हाई स्कूल के प्रधानाचार्य पद के लिए बनी साक्षात्कार समिति जिसमे पांच सदस्य थे, उसके वह अध्यक्ष थे। साथ ही इविंग क्रिश्चियन कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य डॉ. मार्विन मैंसी, पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. एसडीचंद, क्राइस्ट चर्च कॉलेज के प्रधानाचार्य आरके चत्री एवं इलाहाबाद हाई स्कूल समिति के तत्कालीन सचिव एचआरमल भी समिति में शामिल थे। समिति साक्षात्कार के लिए बैठी तो अभ्यर्थियों का जो शैक्षणिक चार्ट बना। उसमें सभी अभ्यर्थियों का पूर्ण शैक्षणिक विवरण दर्शाया गया था। चयन समिति के पांचों सदस्यों के हस्ताक्षर थे।
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बीएड का कोर्स करने के लिए नहीं ली छुट्टी
उक्त चार्ट में भी डेविड को वर्ष 2007 में अंग्रेजी विषय से छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर से एमए उत्तीर्ण होना दिखाया गया है। वहीं, डेविड का यह कहना कि उक्त मार्कशीट उनकी नहीं है, यह झूठ एवं धोखा है। यही नहीं, डेविड ने अपनी जो बीएड की अंक तालिका दिखाई है, उसमें संस्थागत परीक्षार्थी के रूप में उत्तीर्ण होना दिखाया है। जबकि उन्होंने ब्वॉयज हाई स्कूल से कभी बीएड का कोर्स करने के लिए छुट्टी नहीं ली।
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विवेचना के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
आरोप है कि 2012 में डेविड ने प्रधानाचार्य के पद का फार्म भरा। इस अनुसार, 11वीं और 12वीं में 10 वर्ष पूर्व पढ़ाने के लिए 2002 में ही एमए पास हो जाना चाहिए था, लेकिन डेविड ने साक्षात्कार के समय 2007 की एमए की अंक तालिका प्रस्तुत की थी। मामले में डीसीपी नगर अभिषेक भारती ने बताया कि एफआईआर दर्ज की गई है। विवेचना के दौरान जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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