{"_id":"6a66751e1c177058f6042035","slug":"financial-losses-can-be-recovered-from-former-village-heads-even-after-they-leave-office-allahabad-news-c-3-ald1030-937693-2026-07-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj News: पद छोड़ने के बाद भी पूर्व प्रधानों से हो सकेगी वित्तीय नुकसान की वसूली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj News: पद छोड़ने के बाद भी पूर्व प्रधानों से हो सकेगी वित्तीय नुकसान की वसूली
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो जाने या पद छोड़ने के बाद भी उनके कार्यकाल के दौरान हुए वित्तीय नुकसान की वसूली उनसे की जा सकती है।
वहीं, अदालत ने यह भी साफ किया है कि ऐसी किसी भी रिकवरी के लिए प्रशासन को कानून में दी गई निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा का कड़ाई से पालन करना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने प्रयागराज के एक पूर्व ग्राम प्रधान शिवपूजन तिवारी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिकाकर्ता का कार्यकाल वर्ष 2010 से 2015 तक था। उनके पद छोड़ने के बाद दर्ज हुई एक शिकायत के आधार पर डीएम प्रयागराज ने जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी और जूनियर इंजीनियर की दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर मई 2018 में पूर्व प्रधान पर 14.84 लाख रुपये की वसूली (सरचार्ज) का आदेश जारी कर दिया गया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट पक्षों को सुनने के बाद यूपी पंचायत राज अधिनियम की धारा 27 का गहन विश्लेषण किया। अदालत ने कहा कि कानून में इस्तेमाल किए गए शब्द स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि पूर्व प्रधानों की अतीत की लापरवाही के लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। मामले में प्रक्रियात्मक खामी पाते हुए कोर्ट ने जिलाधिकारी के रिकवरी आदेश को रद्द कर दिया।
पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमों के अनुसार, रिकवरी या सरचार्ज की जांच करने का वैधानिक अधिकार केवल मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी (सहकारी समितियां एवं पंचायत) के पास है, न कि जिलाधिकारी की ओर से गठित किसी सामान्य समिति के पास। अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर की गई जांच को अवैध ठहराते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत दी और रिकवरी ऑर्डर निरस्त कर दिया।
विज्ञापन
वहीं, अदालत ने यह भी साफ किया है कि ऐसी किसी भी रिकवरी के लिए प्रशासन को कानून में दी गई निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा का कड़ाई से पालन करना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने प्रयागराज के एक पूर्व ग्राम प्रधान शिवपूजन तिवारी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता का कार्यकाल वर्ष 2010 से 2015 तक था। उनके पद छोड़ने के बाद दर्ज हुई एक शिकायत के आधार पर डीएम प्रयागराज ने जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी और जूनियर इंजीनियर की दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर मई 2018 में पूर्व प्रधान पर 14.84 लाख रुपये की वसूली (सरचार्ज) का आदेश जारी कर दिया गया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट पक्षों को सुनने के बाद यूपी पंचायत राज अधिनियम की धारा 27 का गहन विश्लेषण किया। अदालत ने कहा कि कानून में इस्तेमाल किए गए शब्द स्पष्ट रूप से यह दर्शाते हैं कि पूर्व प्रधानों की अतीत की लापरवाही के लिए भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। मामले में प्रक्रियात्मक खामी पाते हुए कोर्ट ने जिलाधिकारी के रिकवरी आदेश को रद्द कर दिया।
पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज नियमों के अनुसार, रिकवरी या सरचार्ज की जांच करने का वैधानिक अधिकार केवल मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी (सहकारी समितियां एवं पंचायत) के पास है, न कि जिलाधिकारी की ओर से गठित किसी सामान्य समिति के पास। अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर की गई जांच को अवैध ठहराते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत दी और रिकवरी ऑर्डर निरस्त कर दिया।