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यूपी: सुप्रीमकोर्ट के फैसले से 50 हजार से अधिक चयनित शिक्षकों को मिलेगी राहत
Wed, 17 Jul 2019 01:31 AM IST
Abhishek Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: Abhishek Singh
Updated Wed, 17 Jul 2019 01:31 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में 2012 से लेकर 2018 के बीच नियुक्त हुए करीब 50 हजार शिक्षकों को राहत मिलेगी। साथ ही उन अभ्यर्थियों को भी राहत मिलेगी जिन्होंने प्रशिक्षण का परिणाम आने के पहले ही टीईटी पास कर ली थी और अभी भी नौकरी के प्रयास में हैं। 2012 में पहली नियुक्ति से लेकर अब तक लगभग 50 हजार ऐसे शिक्षकों का चयन हो चुका है, जिनका बीएड-बीटीसी का परिणाम टीईटी पास करने के बाद आया। हाईकोर्ट ने मई 2018 में बीएड-बीटीसी के रिजल्ट से पहले आए टीईटी के प्रमाणपत्र और इसके आधार पर मिली नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया थ। इस आदेश को सुप्रीमकोर्ट ने पलट दिया है।
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प्रदेश में पहली बार यूपी बोर्ड की ओर से आयोजित टीईटी से लेकर अब तक जितनी बार टीईटी हुए, हर बार बड़ी संख्या में ऐसे परीक्षार्थी सफल हो गए, जिनका बीएड-बीटीसी का प्रशिक्षण पूरा नहीं हुआ था। सुप्रीमकोर्ट के फैसले से 2012 के बाद प्राथमिक विद्यालयों में हुई 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती, 9770, 10800, 10000, 15000, 16448 और 12460 सहायक अध्यापकों, उर्दू भर्ती के साथ जूनियर हाईस्कूल के लिए हुई 29334 विज्ञान-गणित सहायक अध्यापक भर्ती के चयनित प्रभावित हो रहे थे।
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मानें तो बीएड-बीटीसी के रिजल्ट से पहले टीईटी के परिणाम से प्रभावित होने वालों की संख्या 50 हजार से अधिक है। इस फैसले के बाद 68500 शिक्षक भर्ती एवं आगामी 69000 शिक्षक भर्ती भी प्रभावित होगी। अब इस भर्ती में बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों के चयन का रास्ता खुल गया है, जो बीएड-बीटीसी से पहले टीईटी पास कर चुके हैं। 68500 शिक्षक भर्ती में शामिल अभ्यर्थियों में कम मेरिट वालों ने अधिक मेरिट और बीएड-बीटीसी से पहले टीईटी पास करने वालों के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट कर दिया, इसके बाद हाईकोर्ट ने यह तय कर दिया कि प्रशिक्षण से पहले टीईटी मान्य नहीं होगा।
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हाईकोर्ट के निर्णय से प्रभावित चयनित शिक्षकों का कहना था कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) के चार अक्तूबर 2011 और 15 मई 2013 के शासनादेश में इस बात कहीं नहीं लिखी है कि प्रशिक्षण का परिणाम पहले पाने वाले को ही टीईटी का प्रमाण पत्र जारी होगा। अर्थात बीएड-बीटीसी से पहले टीईटी पास करने वाले को प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा।