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मन में बैठा डर और तनाव, भविष्य कर अनिश्चितता से लोग अवसाद में

Tue, 21 Apr 2020 01:03 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: इलाहाबाद ब्यूरो Updated Tue, 21 Apr 2020 01:03 AM IST
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fear and stress in mind uncertainty in future people in depression

केस - 1


करेली की गर्भवती महिला ने एसआरएन के मनोचिकित्सा विभाग के अध्यक्ष को काल कर बताया कि जबसे लॉकडाउन हुआ है और कोरोना का प्रकोप बढ़ा है। उसे रात में नींद नहीं आ रही है। घबराहट लग रही है और सोचते-सोचते उसे पसीना आ रहा है। उसे भविष्य को लेकर भय है।

केस - 2
हैलो डॉक्टर! मेरा बेटा मानसिक रूप से अस्वस्थ्य है। दवा मिलने में भी परेशानी हो रही है। कहीं इसकी तबीयत ज्यादा न खराब हो जाए और मैं इसे डॉक्टर को न दिखा सकूं। झूंसी की रहने वाली एक शिक्षिका ने यह परेशानी फोन पर कॉन्विन अस्पताल की मनोवैज्ञानिक से बताई। उसे इस बात का डर है कि कहीं लॉकडाउन बढ़ गया और उसके बेटे की तबीयत ज्यादा खराब होने पर वह डॉक्टर को नहीं दिखा पाएगी।

केस - 3
शराब पीने वाले ने काल कर डॉक्टर को बताया कि उसे शराब पीने की लत है। वह रोज शराब पीता है। लॉकडाउन से उसे शराब नहीं मिल पा रही है। उसके हांथ कांप रहे हैं। खाना भी नहीं खा पा रहा हूं। पेट में ऐसा लग रहा है कि आंते सूख गईं हैं। उदासी है, नींद गायब है। उन्हें बताया गया कि शराब ना पीने से यह परेशानी हैं।

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Depression - फोटो : Pixabay

कोरोना के बढ़ते प्रकोप को कम करने के लिए सरकार ने भले ही लॉकडाउन कर दिया हो लेकिन इसका साइडइफ्ेक्ट भी दूसरी तरफ नजर आने लगा है। लोगों में डर, भय, तनाव, अवसाद जैसी मानसिक परेशानियां घर करने लगीं हैं। लोग मनोचिकित्सकों को फोन कर लॉकडाउन के दौरान मानसिक परेशानियों से बचने का उपाय पूछ रहे हैं।


स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. वीके सिंह कहते हैं कि उन्हें ऐसी रोजाना दो-तीन काल आती है कि कोरोना से जो हालात बने हैं। उससे लोगों के मन में डर, भय का माहौल है। लोगों में उदासीनता, नकारात्मक विचार तेजी से पनप रहा है। प्रो. वीके सिंह कहते हैं कि इस समय समाज के भिन्न-भिन्न तबकों की सामाजिक, आर्थिक, शारीरिक सहित कई अलग-अलग परेशानियां सामने आ रही हैं।

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तनाव - फोटो : getty images

कोई मजदूर है तो उसे रोजी-रोटी और जीवनयापन का डर है। महिला है तो उसे अपनी और बच्चों को सुरक्षा को लेकर चितिंत है। इससे अनिश्चितताओं का माहौल बन रहा है। इससे लोग अवसाद में जा रहे हैं। शहर में प्रो. वीके सिंह के पास आ रही शिकायतों की तहर दर्जनभर से अधिक मनोचिकित्सक हैं जो लॉकडाउनके बाद शुरू हुई रोजाना 50 से अधिक मनोसमस्यओं को दूर कर रहे हैं। मनोचिकित्सकों ने लोगों की ऐसी परेशानियों को दूर करने के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू कर रखा है।

उधर, कॉल्विन अस्पताल की नैदानिक मनोवैज्ञानिक इशान्या राज कहती हैं कि उनकी ओपीडी में और फोन पर रोजाना चार-पांच मरीज ऐसी शिकायतें कर रहे हैं। जिसमें दवाइयां न मिली तो क्या होगा, डॉक्टर सामान्य मरीजों को नहीं देख रहे हैं, प्राईवेट डॉक्टर के क्लीनिक बंद हैं, हमें इमरजेंसी सुविधा चाहिए तो क्या करेंगे। इस तरह के नकारात्मक प्रश्न उनके दिमाग में उपज रहे हैं। जो लोग पहले से ही मनोरोगों की चपेट में हैं। उनमें परेशानियों का दौर चल रहा है। ऐसे में लोगों का संभलकर और सचते रहने की जरूरत हैं।

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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

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