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Prayagraj : डीएम के सामने रो पड़ा किसान, बोला- उचित मुआवजा नहीं मिला तो साहब ट्रेन से कट कर दे दूंगा जान

Thu, 04 Jan 2024 05:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 04 Jan 2024 05:33 PM IST
सार

जसरा बायपास के निर्माण के काम को किसानों ने 29 दिसम्बर को पचखरा गांव में रोकवा दिया। मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार से किसान नेता केके मिश्रा व किसानों से बहस के बाद जिलाधिकारी ने किसानों के साथ बातचीत करने का समय दिया था।

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Farmer cried in front of DM, said - Sir, if I don't get proper compensation
भूमि का मुआवजा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जसरा बाईपास में अधिग्रहित भूमि का बना कम मुआवजे को लेकर काम रोकने के बाद किसानों का प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से उनके कार्यालय पर मिलने गया। प्रतिनिधि मंडल में शामिल किसान रामबाबू कुशवाहा अपने को रोक न सका जिलाधिकारी के समक्ष रोते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा " मेरे पास यही भूमि है ,इसी से मैं अपने परिवार का भरण पोषण करता हूं। मेरे जमीन की कीमत तय मुआवजा से बहुत ज्यादा है। साहब न्याय कीजिए नहीं मैं अपनी जान दे दूंगा, आप सड़क बनवा लीजिएगा। "

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जसरा बाईपास के निर्माण के काम को किसानों ने 29 दिसंबर को पचखरा गांव में रोकवा दिया। मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार से किसान नेता केके मिश्रा व किसानों से बहस के बाद जिलाधिकारी ने किसानों के साथ बातचीत करने का समय दिया था। किसानों के प्रतिनिधि मंडल के नेता केके मिश्रा ने जिलाधिकारी से मुआवजा बढ़ा कर देने के बाद ही काम लगाने का अनुरोध किया।

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आक्रोशित किसानों ने जिलाधिकारी से काम नहीं लगने देने की बात भी कही। किसानों को डीएम ने उचित कार्यवाही का आश्वासन देते हुए एडीएम जगदंबा सिंह को प्रकरण की जिम्मेदारी दिया। गौरतलब है कि मार्च 2023 से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई। संबंधित भूमि व रकबे का गजट प्रकाशित किया गया। जून माह में किसानों के नाम के साथ रकबे का प्रकाशन प्रमुख अखबारों में प्रकाशित किया गया।
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किसानों के द्वारा कोई विरोध नहीं किया गया, लेकिन सितंबर माह में मुआवजे के निर्धारण की जानकारी में कम मुआवजे को लेकर किसान असंतुष्ट हो गए और 10 सितंबर को जसरा-दौना मंदिर पर किसान नेता केके मिश्रा की अगुआई में किसान पंचायत कर आंदोलन का निर्णय लिया।धरना प्रदर्शन व आमरण अनशन किसानों द्वारा किया गया। सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी से लेकर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या तक अपनी गुहार किसानों ने लगाई।

मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अपर आयुक्त, एडीएम नजूल विशेष भूमि आधिपत्य अधिकारी व एनएचएआई के अधिकारियों ने किसानों के प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठक कर किसानों का पक्ष सुना। इसके बाद अधिकारियों को किसानों की समस्या हल करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया था। किसानों ने संबंधित अधिकारियों को मुआवजे से संबंधित आवश्यक कागजात दिए। परंतु आज तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला।

 

किसानों का कहना है कि 2015 में रीवा बाईपास के निर्माण में अधिग्रहित की गई गौहनियां और अमरेहा ग्राम सभा के किसानों की भूमि का मुआवजा 80 लाख रुपये बीघा मुआवजा दिया गया था। आठ वर्ष बाद 32 लाख बीघा बनाया गया है, जबकि जमीन की कीमत काफी अधिक हो गई है। किसान गुरु चरन साहू ने बताया कि रीवा बाईपास में मेरी भूमि संख्या 146 का हिस्सा अधिग्रहण किया गया था और 80 लाख बीघा मुआवजा मिला था। उसी भूमि का शेष भाग जसरा बायपास में अधिग्रहित किया गया है। उसका मुआवजा 32 लाख बीघा बनाया गया है, जबकि मेरी जमीन की कीमत बहुत अधिक है। इसी तरह पांडर, पचखरा , खटंगिया व जसरा की भूमि भी कीमती है।

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