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हाईकोर्ट : समय पर संपत्ति की घोषणा नहीं करना कर्मचारी की चूक, निंदा प्रविष्टि बरकरार

Wed, 14 Oct 2026 07:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 14 Oct 2026 07:31 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निर्धारित समय पर संपत्ति की घोषणा नहीं करना कर्मचारी की चूक है। 10 साल तक घोषणा नहीं करने वाला कर्मचारी किसी राहत का हकदार नहीं हो सकता।

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Failure to declare assets on time is an employee's lapse; censure entry upheld.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निर्धारित समय पर संपत्ति की घोषणा नहीं करना कर्मचारी की चूक है। 10 साल तक घोषणा नहीं करने वाला कर्मचारी किसी राहत का हकदार नहीं हो सकता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने प्रयागराज के वाणिज्य कर विभाग में तैनात रहे दिनेश वर्मा की याचिका खारिज कर दी। साथ ही याची के खिलाफ निंदा प्रविष्टि (सेंसर एंट्री) के लघु दंड को बरकरार रखने वाले राज्य सेवा न्यायाधिकरण के आदेश पर अपनी मुहर लगा दी।

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याची ने न्यायाधिकरण के नौ जून के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायाधिकरण ने संपत्ति का विवरण देर से देने के मामले में कर्मचारी पर लगाए गए बड़े दंडों को रद्द कर दिया था, लेकिन निंदा प्रविष्टि के लघु दंड को बरकरार रखा था।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि संपत्ति की घोषणा से संबंधित शासनादेश की जानकारी कर्मचारी को विधिवत नहीं दी गई थी। न्यायाधिकरण ने भी अपने फैसले में इस तथ्य का उल्लेख किया था। कहा था कि विभागीय रिकॉर्ड से यह स्पष्ट नहीं है कि निर्धारित समय में संपत्ति का ब्योरा नहीं देने पर वेतन वृद्धि, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभ रोकने संबंधी शासनादेश की ओर से जानकारी कर्मचारी को दी गई थी या नहीं। हालांकि, कर्मचारी ने बाद में संपत्ति का विवरण दे दिया था। इसलिए निंदा प्रविष्टि का दंड उचित नहीं है।
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वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया और न्यायाधिकरण के फैसले को सही बताया। कोर्ट ने पाया कि कर्मचारी को शुरुआत में संपत्ति का ब्योरा देने के लिए कहा गया था, लेकिन उसने इसका पालन नहीं किया। इसके बाद विभाग की ओर से कोई अतिरिक्त नोटिस या संवाद नहीं किया गया, जिसके बाद कर्मचारी ने काफी देर से विवरण पेश किया। कोर्ट ने माना कि संपत्ति की घोषणा करने में कर्मचारी की ओर से चूक हुई थी। न्यायाधिकरण की ओर से निंदा प्रविष्टि का लघु दंड बरकरार रखने के फैसले में कोई ऐसी त्रुटि नहीं मिली, जिसके आधार पर हस्तक्षेप किया जाए।

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