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UP : साक्ष्य उपलब्ध हैं तो गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई सही, आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

Fri, 11 Aug 2023 06:42 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 11 Aug 2023 06:42 AM IST
सार

याचियों के खिलाफ मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा थाने में सार्वजनिक संपत्ति नुकसान पहुंचाने, खान एंड खनिज अधिनियम सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में भी प्राथमिकी दर्ज करते हुए कार्रवाई कर दी गई। याचियों ने पुलिस की इस कार्रवाई को चुनौती दी।

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f evidence is available then action under Gangster Act is correct, accused did not get relief from High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान साक्ष्य उपलब्ध हैं, अपराध की प्रकृति गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों के तहत है तो गैंगस्टर एक्ट में की गई कार्रवाई सही है। आरोपी का नाम गैंगस्टर सूची में शामिल किया जा सकता है।

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यह गैंगस्टर एक्ट नियम 21 के नियम 2022 के अनुसार है, जो कि नियम पांच, आठ और 10 के विपरीत व अपवाद स्वरूप है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने उस्मान व दो अन्य और मोहम्मद आजम की याचिका पर एक साथ सुनवाई कर खारिज करते हुए दिया है।

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याचियों के खिलाफ मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा थाने में सार्वजनिक संपत्ति नुकसान पहुंचाने, खान एंड खनिज अधिनियम सहित आईपीसी की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में भी प्राथमिकी दर्ज करते हुए कार्रवाई कर दी गई। याचियों ने पुलिस की इस कार्रवाई को चुनौती दी।

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याचियों की ओर से कहा गया कि जांच के दौरान गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती है। यह गैंगस्टर नियम की धारा 5(3)(सी), 8 और 10 के खिलाफ है। किसी केस की जांच पूरी होने के बाद ही गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है। जांच के दौरान नहीं की जा सकती है। याचियों के अधिवक्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अंकित कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य केस में दिए गए फैसले का हवाला दिया। सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि जांच के दौरान गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की जा चुकी है।

कोर्ट ने कहा कि गैंगस्टर नियम 2021 के नियम 22 इसका अपवाद है। न केवल एक केस के आधार पर गैंगस्टर की कार्रवाई की जा सकती है बल्कि जांच के दौरान भी गैंगस्टर एक्ट लगाया जा सकता है और इस विशेष अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस आयुक्त या फिर मजिस्ट्रेट गैंगस्टर सूची में नाम दर्ज कर सकता है और आरोप पत्र विशेष कोर्ट में दाखिल किया जा सकता है। कोर्ट ने अपनी इन्हीं टिप्पणियों के साथ याचियों की अर्जी खारिज कर दी।

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