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चीनी से गुड़ महंगा, तेल की धार भी गरम
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Mon, 12 Jan 2015 11:49 PM IST
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गन्ना पेराई की सीजन होने के बाद भी गुड़ के भाव आसमान पर चढ़े हुए हैं। थोक में सस्ता होने के बाद भी फुटकर ग्राहकों के लिए यह चीनी से भी महंगा पड़ रहा है। फुटकर में दुकानदार ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं। कारोबारी मंडियों में गुड़ की कमी बताकर 40 रुपये प्रति किग्रा तक ले रहे हैं। उधर, जनवरी के पहले सप्ताह से ही रिफाइंड और पॉम ऑयल के दाम भी पांच से छह रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।
आढ़ती दावा कर रहे हैं कि केंद्र सरकार ने आयात शुल्क पांच फीसदी बढ़ा दिया है। बढ़े दाम इसकी वजह हैं। सरसों के तेल के दाम बढ़ने के कारण आवक की कमी बताया जा रहा है। ठंड का मौसम स्वाद के शौकीनों के लिए अच्छा माना जाता है। खाने की सर्वाधिक स्वाद इसी सीजन में मिलते हैं। थोक महंगाई सूचकांक शून्य फीसदी तक पहुंचने के सरकारी आंकड़ों से उपभोक्ताओं को यकीन था कि यह ठंड मौज से गुजरेगी लेकिन कीमतों ने इन उम्मीदों को ठंडा कर दिया है। थोक बाजार में गुड़ के दाम 2700-2800 रुपये से बढ़कर 2900-3000 रुपये तक पहुंच चुका है। सप्ताहभर में गुड़ के दाम 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़े हैं। हालांकि, चीनी 3000 से 3100 रुपये क्विंटल है यानी गुड़ से 100 रुपये महंगी। इसके विपरीत फुटकर बाजार में चीनी 33 से 35 रुपये प्रति किग्रा है। जबकि, गुड़ के भाव 35 से 40 रुपये प्रति किग्रा हैं। आढ़ती दावा कर रहे हैं कि मकर संक्रांति के दौरान गुड़ी की मांग बढ़ती है। साथ ही गजक की मांग भी बढ़ी है। हालांकि, अगले सप्ताह तक कीमतों में राहत की उम्मीद कर सकते हैं।
उधर, सरसों तेल, रिफाइंड और पॉम ऑयल की कीमतों में भी तेजी आ गई है। आढ़ती सुभाष केसरवानी के मुताबिक रिफाइंड व पॉम ऑयल में 50-50 रुपये, सरसों तेल में 60 रुपये प्रति टिन की बढ़ोतरी पिछले दस दिनों में हो गई है। गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश केसरवानी के मुताबिक केंद्र सरकार ने पहली जनवरी से पांच फीसदी आयात शुल्क बढ़ने से रिफाइंड और पॉम ऑयल के दाम बढ़े हैं। साथ ही आवक कम और खपत ज्यादा होने से भी दाम बढ़ रहे हैं।
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आढ़ती दावा कर रहे हैं कि केंद्र सरकार ने आयात शुल्क पांच फीसदी बढ़ा दिया है। बढ़े दाम इसकी वजह हैं। सरसों के तेल के दाम बढ़ने के कारण आवक की कमी बताया जा रहा है। ठंड का मौसम स्वाद के शौकीनों के लिए अच्छा माना जाता है। खाने की सर्वाधिक स्वाद इसी सीजन में मिलते हैं। थोक महंगाई सूचकांक शून्य फीसदी तक पहुंचने के सरकारी आंकड़ों से उपभोक्ताओं को यकीन था कि यह ठंड मौज से गुजरेगी लेकिन कीमतों ने इन उम्मीदों को ठंडा कर दिया है। थोक बाजार में गुड़ के दाम 2700-2800 रुपये से बढ़कर 2900-3000 रुपये तक पहुंच चुका है। सप्ताहभर में गुड़ के दाम 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़े हैं। हालांकि, चीनी 3000 से 3100 रुपये क्विंटल है यानी गुड़ से 100 रुपये महंगी। इसके विपरीत फुटकर बाजार में चीनी 33 से 35 रुपये प्रति किग्रा है। जबकि, गुड़ के भाव 35 से 40 रुपये प्रति किग्रा हैं। आढ़ती दावा कर रहे हैं कि मकर संक्रांति के दौरान गुड़ी की मांग बढ़ती है। साथ ही गजक की मांग भी बढ़ी है। हालांकि, अगले सप्ताह तक कीमतों में राहत की उम्मीद कर सकते हैं।
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उधर, सरसों तेल, रिफाइंड और पॉम ऑयल की कीमतों में भी तेजी आ गई है। आढ़ती सुभाष केसरवानी के मुताबिक रिफाइंड व पॉम ऑयल में 50-50 रुपये, सरसों तेल में 60 रुपये प्रति टिन की बढ़ोतरी पिछले दस दिनों में हो गई है। गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश केसरवानी के मुताबिक केंद्र सरकार ने पहली जनवरी से पांच फीसदी आयात शुल्क बढ़ने से रिफाइंड और पॉम ऑयल के दाम बढ़े हैं। साथ ही आवक कम और खपत ज्यादा होने से भी दाम बढ़ रहे हैं।
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