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हर राज्य विश्वविद्यालय में होगा मुक्त विश्वविद्यालय का अध्ययन केंद्र
Fri, 01 Jan 2021 08:01 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 01 Jan 2021 08:01 PM IST
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- फोटो : UPRTOU
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प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय का एक अध्ययन केंद्र खोला जाएगा। इस बाबत राज्यपाल यानी कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी केयूर सी. संपत ने राज्यपाल की ओर से सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
हालांकि दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में पहले से ही मुक्त विश्वविद्यालय के एक-एक अध्ययन केंद्र का संचालन किया जा रहा है। इसी का हवाला देते हुए मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. जीएस शुक्ल ने राज्यपाल को पत्र भेजकर अनुरोध किया था कि अन्य विश्वविद्यालयों में भी मुक्त विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्र खुलने चाहिए। कुलसचिव ने अपने पत्र में कहा था कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2030 तक उच्च शिक्षा में नामांकन अनुपात 50 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इसमें मुक्त विश्वविद्यालय की अहम भूमिका है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रदेश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन राज्य विश्वविद्यालय अपने यहां उत्तर प्रदेश के एक मात्र मुक्त राज्य विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्र को खोलने की रुचि नहीं रखते हैं, जो प्रदेश सरकार की मंश के विपरीत है।
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मुक्त विश्वविद्यालय के अनुरोध पर अब कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी ने राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र जारी कर प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है। मुक्त विवि के कुलपति प्रो. कामश्ेवर नाथ सिंह का कहना है कि राज्य विश्वविद्यालयों में सीटों की संख्या सीमित होती है। ऐसे में अध्ययन केंद्र खुलने से मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से लोगों को उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका मिलेगा और तभी वर्ष 2030 तक उच्च शिक्षा में नामांकन 50 फीसदी तक पहुंच सकेगा।
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हालांकि दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में पहले से ही मुक्त विश्वविद्यालय के एक-एक अध्ययन केंद्र का संचालन किया जा रहा है। इसी का हवाला देते हुए मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. जीएस शुक्ल ने राज्यपाल को पत्र भेजकर अनुरोध किया था कि अन्य विश्वविद्यालयों में भी मुक्त विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्र खुलने चाहिए। कुलसचिव ने अपने पत्र में कहा था कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2030 तक उच्च शिक्षा में नामांकन अनुपात 50 फीसदी तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इसमें मुक्त विश्वविद्यालय की अहम भूमिका है।
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पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रदेश के लगभग सभी विश्वविद्यालयों में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन राज्य विश्वविद्यालय अपने यहां उत्तर प्रदेश के एक मात्र मुक्त राज्य विश्वविद्यालय के अध्ययन केंद्र को खोलने की रुचि नहीं रखते हैं, जो प्रदेश सरकार की मंश के विपरीत है।
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मुक्त विश्वविद्यालय के अनुरोध पर अब कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी ने राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र जारी कर प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है। मुक्त विवि के कुलपति प्रो. कामश्ेवर नाथ सिंह का कहना है कि राज्य विश्वविद्यालयों में सीटों की संख्या सीमित होती है। ऐसे में अध्ययन केंद्र खुलने से मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से लोगों को उच्च शिक्षा हासिल करने का मौका मिलेगा और तभी वर्ष 2030 तक उच्च शिक्षा में नामांकन 50 फीसदी तक पहुंच सकेगा।